भारत ने उठाई छोटे देशों की आवाज, जन-केंद्रित कूटनीति पर जोर
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 3 Nov, 2026 04:39 PMसेंट जॉन्स। कैरेबियाई द्वीप देश एंटीगुआ और बारबुडा के सेंट जॉन्स में आयोजित राष्ट्रमंडल शासनाध्यक्षों की बैठक (सीएचओजीएम 2026) के मंच से भारत ने वैश्विक भलाई, बहुपक्षवाद में सुधार और छोटे द्वीपीय देशों के हितों के संरक्षण की मजबूत वकालत की है। इस अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने भारत की जन-केंद्रित विदेश नीति और प्रतिबद्धता को वैश्विक नेताओं के सामने रखा। सीएचओजीएम के मुख्य शिखर सम्मेलन से पहले आयोजित 'प्री-सीएचओजीएम राष्ट्रमंडल विदेश मंत्रियों की बैठक' को संबोधित करते हुए सचिव सिबी जॉर्ज ने राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) के भविष्य की रूपरेखा पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में राष्ट्रमंडल को अब ऐसे ठोस, व्यावहारिक और जन-केंद्रित परिणामों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है, जो सभी सदस्य देशों के साझा हितों और साझा सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ा सकें। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर लिखा सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्री-सीएचओजीएम कॉमनवेल्थ विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कॉमनवेल्थ को ऐसे ठोस और जन-केंद्रित परिणामों पर ध्यान देने की आवश्यकता है, जो कॉमनवेल्थ के साझा हितों और मूल्यों को आगे बढ़ा सकें। इनमें विकास के लिए तकनीक का लोकतंत्रीकरण, जलवायु संबंधी कार्यों और आपदाओं से निपटने की क्षमता को मजबूत करना, तथा बहुपक्षवाद में सुधार की वकालत करना जैसे मुद्दे शामिल हैं। जायसवाल ने अपनी एक अन्य पोस्ट में लिखा जॉर्ज ने सीएचओजीएम 2026 के दौरान, 'छोटे देशों के लिए साझेदारी और निवेश को बढ़ाना' विषय पर हुई 'छोटे देशों पर कॉमनवेल्थ मंत्रिस्तरीय बैठक' में हिस्सा लिया। उन्होंने छोटे देशों के सामने आ रहे कई परस्पर जुड़े संकटों का जिक्र किया। साथ ही, उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने में छोटे देशों और एसआईडीएस (छोटे द्वीप विकासशील देशों) को समर्थन देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि यह समर्थन आपसी सम्मान, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, साझा आकांक्षाओं और क्षमताओं पर आधारित साझेदारी के माध्यम से दिया जाएगा। बता दें कि भारत एसआईडीएस को अपने वैश्विक कूटनीतिक दृष्टिकोण के केंद्र में रखता है। भारत की रणनीति इन देशों को केवल वित्तीय सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ जंग में उन्हें एक विश्वसनीय भागीदार मानता है। 'सागर' (सुरक्षा और क्षेत्र में सभी के लिए विकास) विजन के तहत, भारत आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे के निर्माण, क्षमता संवर्धन और समुद्री सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत कर इन द्वीपीय राष्ट्रों के सतत विकास का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। भारत ने अब इस मंच से स्पष्ट कर दिया कि 'साउथ-साउथ' सहयोग के तहत आपसी सम्मान, राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, साझा क्षमताओं और सामान्य आकांक्षाओं पर टिकी यह रणनीतिक साझेदारी विकासशील देशों को एक नई आर्थिक मजबूती देगी। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)


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