एम्स ने रचा मेडिकल इतिहास, दिल्ली से अंटार्कटिका तक हुआ मरीज का रीयल-टाइम अल्ट्रासाउंड
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 4 Feb, 2026 04:12 PMनई दिल्ली | 04 फरवरी 2026 एम्स रिसर्च डे 2026 के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की। प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर एसएच ने दिल्ली में बैठकर अंटार्कटिका स्थित भारतीय रिसर्च स्टेशन “मैत्री” में मौजूद एक मरीज का रीयल-टाइम अल्ट्रासाउंड किया। यह लगभग 12,000 से 14,000 किलोमीटर की दूरी पर किया गया दुनिया का सबसे लंबा टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड माना जा रहा है, जिसने इलाज की नई परिभाषा गढ़ दी है। इस अत्याधुनिक तकनीक के बारे में प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर एसएच ने बताया कि दिल्ली में डॉक्टर एक हाईटेक हैप्टिक डिवाइस का उपयोग करते हैं, जो हाथ की हर हलचल को महसूस कराती है। डॉक्टर की यही मूवमेंट अंटार्कटिका में लगे रोबोटिक आर्म तक तुरंत पहुंचती है, जो अल्ट्रासाउंड प्रोब को नियंत्रित करता है। प्रोब मरीज के शरीर पर सही स्थान पर रखकर स्कैन करता है और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें रीयल-टाइम में दिल्ली तक पहुंच जाती हैं, जिससे जांच बिल्कुल सामने खड़े होकर करने जैसी महसूस होती है। अंटार्कटिका जैसे अत्यंत ठंडे और अलग-थलग क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों के लिए मेडिकल सुविधाएं बेहद सीमित होती हैं। वहां आपात स्थिति में सही और समय पर जांच न हो पाने से जान का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए डॉ. विकास डोगरा ने अपने अनुभव के आधार पर इस तकनीक को वहां लागू करने का सुझाव दिया। डॉ. आनंद कुमार सिंह और डॉ. प्रदीप मल्होत्रा के मार्गदर्शन में सभी जरूरी मंजूरियां लेकर इस सिस्टम को सुरक्षित और व्यावहारिक बनाया गया। यह तकनीक केवल अंटार्कटिका तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उपयोग आपदा प्रभावित क्षेत्रों, दूरदराज के गांवों, ऊंचे पहाड़ी इलाकों, समुद्र में मौजूद तेल रिग्स, जहाजों और यहां तक कि युद्ध क्षेत्रों में भी किया जा सकता है। यह रोबोटिक आर्म एम्स, आईआईटी दिल्ली, इंडियन हेल्थकेयर फाउंडेशन फॉर क्रिएटिविटी, नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च और राजीव गांधी सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल के संयुक्त प्रयास से विकसित किया गया है। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर सुबीर कुमार साहा और युवा शोधकर्ताओं उदयन बनर्जी व सिद्धार्थ गुप्ता ने इसे सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। एम्स ने रचा मेडिकल इतिहास: दिल्ली से अंटार्कटिका तक किया गया रीयल-टाइम अल्ट्रासाउंड एम्स रिसर्च डे 2026 पर चिकित्सा विज्ञान में एक नई मिसाल देखने को मिली। एम्स के प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर एसएच ने दिल्ली में बैठकर अंटार्कटिका स्थित भारतीय रिसर्च स्टेशन “मैत्री” में मौजूद मरीज का रीयल-टाइम अल्ट्रासाउंड किया। करीब 12,000 से 14,000 किलोमीटर की दूरी पर हुआ यह परीक्षण दुनिया का सबसे लंबा टेली-रोबोटिक अल्ट्रासाउंड माना जा रहा है। इस तकनीक में डॉक्टर दिल्ली में एक विशेष हैप्टिक डिवाइस का उपयोग करते हैं, जो हाथ की हर हलचल को महसूस कराती है। डॉक्टर की मूवमेंट तुरंत अंटार्कटिका में लगे रोबोटिक आर्म तक पहुंचती है, जो अल्ट्रासाउंड प्रोब को नियंत्रित करता है। स्कैन की साफ तस्वीरें उसी समय दिल्ली तक पहुंच जाती हैं, जिससे जांच बिल्कुल पास से की गई जैसी लगती है। अंटार्कटिका जैसे दूर और कठिन इलाके में मेडिकल सुविधाएं सीमित होती हैं। वहां आपात स्थिति में सही जांच समय पर न हो पाने से बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। इसी जरूरत को देखते हुए इस तकनीक को विकसित किया गया, ताकि गंभीर हालात में भी विशेषज्ञ डॉक्टर दूर से सही जांच कर सकें। यह तकनीक भविष्य में आपदा क्षेत्रों, दूरदराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों, समुद्र में जहाजों और तेल रिग्स तक इलाज पहुंचाने में मदद करेगी। यह रोबोटिक सिस्टम एम्स, आईआईटी दिल्ली और अन्य संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया है, जो भारत की तकनीकी क्षमता को दुनिया के सामने दर्शाता है।


No Previous Comments found.