उत्तराखंड कौथिक-2026 में सीएम धामी ने किया लोकसंस्कृति और विरासत के संरक्षण का आह्वान, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर
मुख्यमंत्री बोले– विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजना भी जरूरी, प्रदेश की 3 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 31 Oct, 2026 10:22 PMदेहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून के रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में अखिल गढ़वाल सभा की ओर से आयोजित उत्तराखंड कौथिक-2026 में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक विरासत और स्थानीय उत्पादों के संरक्षण एवं संवर्धन का आह्वान करते हुए कहा कि प्रदेश की लोकसंस्कृति हमारी पहचान ही नहीं, बल्कि हमारी आत्मा भी है। लोकभाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वेशभूषा, मेलों और त्योहारों को संरक्षित कर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सभी का सामूहिक दायित्व है।
मुख्यमंत्री ने आयोजन के लिए अखिल गढ़वाल सभा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड कौथिक जैसे सांस्कृतिक महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से प्रदेश की लोककलाओं, हस्तशिल्प, पारंपरिक खानपान और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने के साथ उन्हें व्यापक पहचान भी मिलती है। उन्होंने महोत्सव में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन करते हुए पारंपरिक हस्तशिल्प, जैविक उत्पादों और उत्तराखंडी व्यंजनों की सराहना की।
विकास के साथ विरासत संरक्षण पर सरकार का विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र के साथ प्रदेश के समग्र विकास और सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण के लिए कार्य कर रही है। इसी क्रम में केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में पुनर्विकास कार्यों के माध्यम से श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वहीं, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, संचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के युवाओं और स्थानीय नागरिकों को अपने गांव और क्षेत्र में ही रोजगार एवं स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए ‘एक जनपद-दो उत्पाद’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ जैसी पहलों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार और नई पहचान दिलाई जा रही है। इसके साथ ही होम-स्टे, कृषि, बागवानी, पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन और सुगंधित पौधों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
3 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की मातृशक्ति ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला है। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में ‘लखपति दीदी’ अभियान के तहत 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों, हस्तशिल्प और लघु उद्यमों के माध्यम से न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं। कौथिक में महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए स्टॉल इस आत्मनिर्भरता की भावना का उदाहरण हैं।
रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि, स्थानीय रोजगार को मिल रही गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन, उद्यमिता और स्थानीय संसाधनों पर आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर पलायन की चुनौती से निपटने की दिशा में काम कर रही है। ‘वेड इन उत्तराखंड’, शीतकालीन पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म जैसी पहलों के माध्यम से प्रदेश में सालभर पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं, होटल व्यवसायियों, होम-स्टे संचालकों और छोटे उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थानीय स्तर पर आजीविका और रोजगार के अवसरों के विस्तार का संकेत है।
विभिन्न राष्ट्रीय सूचकांकों में उत्तराखंड की उपलब्धियों का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड ने स्टार्टअप इंडिया की राज्यों की रैंकिंग में ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में भी प्रदेश देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा और केरल के साथ संयुक्त रूप से सर्वोच्च स्कोर प्राप्त किया।
इसके अलावा राज्य की सिंगल विंडो प्रणाली को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है। राज्य खनन तत्परता सूचकांक में उत्तराखंड को श्रेणी-सी में देशभर में दूसरा स्थान मिला है, जबकि लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस में प्रदेश को ‘अचीवर्स’ श्रेणी में स्थान प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने इन उपलब्धियों को सुशासन, पारदर्शिता और निवेश अनुकूल वातावरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम बताया।
लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में युवाओं की भूमिका अहम
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिकता और विकास की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान को बनाए रखने के लिए लोकभाषाओं, लोककलाओं, रीति-रिवाजों और पारंपरिक वेशभूषा का संरक्षण आवश्यक है। इसमें विशेष रूप से युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उन्होंने विश्वास जताया कि अखिल गढ़वाल सभा सहित प्रदेश की विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाएं उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में निरंतर योगदान देती रहेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश के श्रेष्ठ राज्यों में शामिल करने के ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ आगे बढ़ रही है और इस लक्ष्य की प्राप्ति में प्रदेशवासियों की सहभागिता महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री खजान दास, अखिल गढ़वाल सभा के पदाधिकारी, विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि, जनप्रतिनिधि, लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, लोकगायिका संगीता ढोंडियाल, लोक कलाकार, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता


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