सीमांत क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक संतुलित विकास सरकार की प्राथमिकता: सीएम धामी

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Lucknow, 4 Oct, 2026 06:02 PM
सीमांत क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक संतुलित विकास सरकार की प्राथमिकता: सीएम धामी

बनबसा, 4 अक्टूबर 2026। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक आयोजित की गई। चंपावत जिले में पहली बार आयोजित इस कैबिनेट बैठक में राज्यहित और जनहित से जुड़े 24 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। फैसलों में वन भूमि, राजस्व, वित्त, कार्मिक, सतर्कता, न्याय, सिंचाई, पशुपालन, उच्च शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन और स्थानीय प्रशासन समेत विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्ताव शामिल रहे।



शासन को सीमांत क्षेत्रों तक ले जाने की पहल

बनबसा में कैबिनेट बैठक आयोजित करने के पीछे सरकार ने शासन को देहरादून तक सीमित रखने के बजाय प्रदेश के दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने की पहल को प्रमुखता दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कैबिनेट की बैठकें केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में भी आयोजित की जाएंगी। इससे स्थानीय समस्याओं, विकास की संभावनाओं और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सीधे शासन के सामने रखने का अवसर मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शासन को जनता के और करीब ले जाना है। अलग-अलग क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें होने से स्थानीय परिस्थितियों और जन अपेक्षाओं को समझने के साथ ही समस्याओं पर त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक संतुलित विकास सरकार की प्राथमिकता है।

वन भूमि और प्रशासनिक व्यवस्था पर अहम निर्णय

कैबिनेट ने वन भूमि हस्तांतरण के मामलों के तकनीकी परीक्षण, ऑनलाइन संरेखण के परीक्षण और नोडल कार्यालय को मजबूत करने के लिए नोडल अधिकारी, वन संरक्षण के कार्यालय में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) गठित करने तथा छह पदों को मंजूरी दी।

वन विभाग में विभागाध्यक्ष से संबंधित व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। निदेशक, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व को विभागाध्यक्ष की सूची से हटाकर मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं तथा मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल को विभागाध्यक्ष घोषित किए जाने को मंजूरी दी गई। सरकार के अनुसार इससे वनाग्नि, आपदा, बाढ़ नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी परिस्थितियों में कार्रवाई में तेजी आएगी।

भूमि नियमितीकरण और पंतनगर एयरपोर्ट के लिए धन

कैबिनेट ने वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों तथा कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। नैनीताल के लालकुआं में संबंधित पट्टेदारों/कब्जाधारकों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार तथा देहरादून के जौनसार-बावर में वर्ग-4 भूमि के विनियमितीकरण का रास्ता भी साफ किया गया।

संबंधित भूमि का विनियमितीकरण एक वर्ष के लिए वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद प्रचलित सर्किल रेट के अनुसार प्रक्रिया होगी।

वहीं, ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तारीकरण से संबंधित हस्तांतरित परिसंपत्तियों के लिए उत्तराखंड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को ₹66.2916 करोड़ की अवशेष धनराशि जारी करने को मंजूरी दी गई।

संपत्ति लेन-देन में PAN सत्यापन

स्टाम्प एवं निबंधन विभाग में संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लेन-देन में क्रेता, विक्रेता और अन्य संबंधित पक्षकारों द्वारा उपलब्ध कराए गए PAN के सत्यापन की व्यवस्था लागू करने को मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्य गलत या फर्जी PAN के इस्तेमाल को कम करना तथा आयकर विभाग को होने वाली रिपोर्टिंग में डेटा की शुद्धता और पारदर्शिता बढ़ाना है।

राजकोषीय घाटे की सीमा तय

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी। संशोधित प्रावधानों के तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा GSDP के तीन प्रतिशत तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल संचयी ऋण की अधिकतम सीमा GSDP के 30 प्रतिशत निर्धारित की गई है।

आपदा और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों में निर्धारित सीमा से अधिक घाटे के लिए नियमानुसार छूट का प्रावधान रहेगा।

स्थानीय निकायों और कर्मचारियों से जुड़े फैसले

छठवें राज्य वित्त आयोग की पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत करने को मंजूरी दी गई। आयोग ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए राज्य के शुद्ध कर राजस्व से स्थानीय निकायों को होने वाले अंतरण तथा वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सिफारिशें दी हैं।

राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत चल-अचल और बहुमूल्य संपत्तियों से संबंधित प्रावधानों को मौजूदा परिस्थितियों तथा अखिल भारतीय सेवा आचरण नियमावली के अनुरूप अद्यतन किया जाएगा।

न्याय और सतर्कता व्यवस्था में बदलाव

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 19 की उपधारा (3) के प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करने को मंजूरी दी गई।

इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के लागू होने के बाद सतर्कता अधिष्ठान से संबंधित वर्ष 1965 की अधिसूचना में आवश्यक संशोधन का फैसला लिया गया।

सतर्कता अधिष्ठान के ढांचे के पुनर्गठन को भी मंजूरी मिली। इसमें 08 आरक्षी ना.पु., 01 आरक्षी डाक रनर और 02 आरक्षी चालक सहित कुल 11 पद समर्पित किए जाएंगे। वहीं मुख्य आरक्षी ना.पु. के पांच पद बढ़ाने तथा छह नए पद सृजित करने को मंजूरी दी गई।

समूह ‘ग’ की भर्ती और लोक सेवा आयोग से जुड़े फैसले

राज्याधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों पर साक्षात्कार प्रक्रिया से संबंधित संशोधन नियमावली को मंजूरी दी गई। जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को संबंधित परिशिष्ट से हटाया जाएगा। वहीं उप कारापाल के पद पर शारीरिक दक्षता परीक्षा और लिखित परीक्षा होने के कारण साक्षात्कार की व्यवस्था समाप्त की जाएगी।

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के कृत्यों के परिसीमन से संबंधित संशोधन विनियम को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को आयोग के परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा।

सार्वजनिक परिसंपत्तियों से मिलने वाली आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित एजेंसी को

नियोजन विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियम) अधिनियम की अनुसूची-3 में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके तहत सार्वजनिक अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश या मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत हिस्सा संबंधित सार्वजनिक अभिकरणों को दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

नया सिंचाई एवं जल निकासी कानून

कैबिनेट ने वर्तमान परिस्थितियों में अप्रासंगिक अथवा अपर्याप्त हो चुके उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम, 1873 को निरस्त करने तथा राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक, 2026 विधानसभा के पटल पर रखने को मंजूरी दी।

कुक्कुट पालकों को DBT से सब्सिडी

कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी भुगतान की व्यवस्था में बदलाव करते हुए आधार सीडेड/लिंक्ड बैंक खाते के माध्यम से DBT से भुगतान करने को मंजूरी दी गई।

पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों के बीच समन्वय, पर्यवेक्षण और प्रभावी प्रशासन के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित करने का निर्णय भी लिया गया।

1.19 लाख विद्यार्थियों के लिए ₹200 करोड़ की योजना

उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता और उद्यमिता बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना, 2026 को मंजूरी दी गई। योजना से राज्य के राजकीय और निजी विश्वविद्यालयों तथा संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत करीब 1.19 लाख विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। योजना पर पांच वर्षों में लगभग ₹200 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी मानकों में भी संशोधन किया गया। संशोधित व्यवस्था के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर तथा मैदानी क्षेत्रों में न्यूनतम 20,000 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र की व्यवस्था की जाएगी। गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पृथक मूल्यांकन मानक भी निर्धारित किए जाएंगे।

नरेन्द्रनगर में उप निबंधक कार्यालय

मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में टिहरी जिले की तहसील नरेन्द्रनगर में उप निबंधक कार्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई। इसके क्षेत्राधिकार में नरेन्द्रनगर तहसील के 98 और पावकी देवी उपतहसील के 35, कुल 133 राजस्व ग्राम शामिल होंगे। इससे क्षेत्रीय जनता को पंजीकरण संबंधी सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी।

इसके अलावा उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की सौंदर्यीकरण उपशाखा को निक्षेपित करने, उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली, 1952) में संशोधन तथा वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा नियमावली, 2026 के प्रख्यापन को मंजूरी दी गई।

मेडिकल कॉलेजों में रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन का पुनर्निर्धारण

राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोंस्ट्रेटर की कमी को देखते हुए संबंधित पदों पर तैनात कार्मिकों के देय वेतन और मानदेय के पुनर्निर्धारण को भी मंजूरी दी गई।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड के प्रत्येक क्षेत्र तक विकास और सुशासन की पहुंच सुनिश्चित करना है। बनबसा में कैबिनेट बैठक के माध्यम से सीमांत क्षेत्रों की आवश्यकताओं को शासन की प्राथमिकताओं से जोड़ने का प्रयास किया गया है। सरकार प्रदेश के पर्वतीय, सीमांत और मैदानी क्षेत्रों के संतुलित विकास के लिए लगातार निर्णय ले रही है।


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