अशोक सिंघल के आदर्शों से बनेगा सशक्त भारत: सीएम धामी

अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष का शुभारंभ, धामी बोले—राम जन्मभूमि आंदोलन में उनका योगदान अविस्मरणीय

YUGVARTA NEWS

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Lucknow, 11 Oct, 2026 06:20 PM
अशोक सिंघल के आदर्शों से बनेगा सशक्त भारत: सीएम धामी

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज को संगठित करने के लिए समर्पित किया। राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनआंदोलन बनाने में उनकी भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी। उनके अखंड, सुरक्षित और स्वाभिमानी भारत के संकल्प को साकार करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

मुख्यमंत्री रविवार को देहरादून के पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित अशोक सिंघल जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व हिंदू परिषद की पत्रिका ‘विश्व हिंदू’ के अशोक सिंघल पर प्रकाशित विशेषांक का विमोचन भी किया।

राम जन्मभूमि आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में निभाई अहम भूमिका

मुख्यमंत्री धामी ने अशोक सिंघल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण, सांस्कृतिक चेतना के जागरण और सेवाभाव की प्रेरणादायी मिसाल है। बड़े दायित्वों का निर्वहन करने के बावजूद उनका जीवन सादगी और सहजता से परिपूर्ण रहा। उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता रहेगा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित पहली धर्म संसद से लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप देने तक अशोक सिंघल का योगदान महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने संतों, धर्माचार्यों और समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा उद्देश्य से जोड़ने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों में निहित मर्यादा, सेवा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा को अपनाकर ही सशक्त एवं संस्कारित समाज का निर्माण किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना की ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यदि अशोक सिंघल आज हमारे बीच होते, तो श्रीराम मंदिर के भव्य स्वरूप को देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होती।

समान नागरिक संहिता और सामाजिक समरसता पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्र और समाज की मजबूती के लिए सामाजिक समरसता, समानता और सभी नागरिकों के अधिकारों का सम्मान आवश्यक है। इसी भावना के अनुरूप उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने, गौवंश के संरक्षण और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए भी सरकार लगातार कदम उठा रही है।

युवाओं को भारतीय संस्कृति और राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने की पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल ऐसे भारत की कल्पना करते थे, जहां युवा आधुनिक शिक्षा के साथ अपने संस्कारों, परंपराओं और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति भी जागरूक हों। राज्य सरकार युवाओं को नशे से दूर रखने तथा शिक्षा, खेल, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनकी प्रतिभा को राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने के लिए प्रयास कर रही है।

उन्होंने दून विश्वविद्यालय में हिंदू अध्ययन केंद्र की स्थापना को भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से परिचित कराना और इन मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।

धार्मिक विरासत के संरक्षण के लिए कई परियोजनाओं पर काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी आध्यात्मिक परंपराओं, प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। राज्य सरकार इस विरासत के संरक्षण के साथ तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर ध्यान दे रही है।

उन्होंने केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों के विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने हरिपुर-कालसी में मां यमुना के तट पर विकसित स्नान घाट और मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में मां यमुना मंदिर और भगवान श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

हरिद्वार कुंभ को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाला कुंभ सनातन संस्कृति, भारतीय आस्था और प्राचीन धार्मिक परंपराओं का भव्य उत्सव होगा। यह आयोजन धार्मिक महत्व के साथ देश की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत का भी प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कुंभ की तैयारियों को मजबूत करने और आयोजन को दिव्य, भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों और वे सुरक्षित एवं सुखद आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटें।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अशोक सिंघल के विचारों और आदर्शों को व्यवहार में उतारना ही उनके जन्म शताब्दी वर्ष को सार्थक बनाने का माध्यम है। राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करने और श्रेष्ठ राज्य के निर्माण के लिए अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ आगे बढ़ती रहेगी।

कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज, संत-महात्मा, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी, कार्यकर्ता और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता

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