हिमालय संरक्षण ही राष्ट्र संरक्षण, डॉ. नित्यानंद के विचार आज भी प्रासंगिक: मुख्यमंत्री

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Lucknow, 9 Feb, 2026 05:35 PM
हिमालय संरक्षण ही राष्ट्र संरक्षण, डॉ. नित्यानंद के विचार आज भी प्रासंगिक: मुख्यमंत्री

देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को दून विश्वविद्यालय, देहरादून में डॉ. नित्यानंद की जन्मशताब्दी वर्ष समारोह के उपलक्ष्य पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सत्तत हिमालयी पर्यावरण पुरस्कार 2025–26 से जयेंद्र सिंह राणा एवं संजय सत्यवली को सम्मानित किया।


मुख्यमंत्री ने डॉ. नित्यानंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन हिमालय, प्रकृति, समाज और राष्ट्र को समर्पित किया। उनकी सोच हिमालय की शिखरों जैसी ऊँची और उनका सेवा-भाव हिमालय की घाटियों से भी गहरा था। उनका मानना था कि हिमालय की रक्षा करना भारतीय सभ्यता और राष्ट्र के भविष्य के लिए भी आवश्यक है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. नित्यानंद ने विज्ञान को अध्यात्म से, शोध को लोक-जीवन से और चिंतन को राष्ट्रहित से जोड़ने का कार्य किया। वे समाज के प्रत्येक वर्ग में राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना का संचार करते रहे। उन्होंने गांवों के सशक्तिकरण के लिए भी आजीवन कार्य किया। वे प्रतिवर्ष अपनी आय से लगभग 40 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान किया करते थे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1991 में उत्तरकाशी और 1999 में चमोली की आपदा के बाद डॉ. नित्यानंद ने बिना किसी विलंब के स्वयंसेवकों के साथ मिलकर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जो आज भी श्रेष्ठ माना जाता है। उन्होंने मनेरी गांव को अपना केंद्र बनाकर वहां 400 से अधिक भूकंपरोधी मकानों के निर्माण का कार्य कराया। साथ ही क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों को मॉडल गांवों के रूप में विकसित किया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. नित्यानंद ने ‘उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति’ का गठन कर सेवा को संस्थागत स्वरूप दिया, जो आज भी देशभर में आपदाओं के समय मानवता की सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रही है। देहरादून में संचालित डॉ. नित्यानंद हिमालय शोध एवं अध्ययन केंद्र उनके विचारों को आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। यह केंद्र हिमालयी अध्ययन, सतत विकास, आपदा प्रबंधन और नीति-निर्माण के क्षेत्र में नई दिशा दे रहा है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार हिमालय संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ग्लेशियर रिसर्च सेंटर, जल स्रोत संरक्षण अभियान जैसे माध्यमों से हिमालय के दीर्घकालिक संरक्षण की दिशा में काम किया जा रहा है। राज्य सरकार ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया है। प्लास्टिक वेस्ट प्रबंधन हेतु डिजिटल डिपॉजिट रिफंड सिस्टम के माध्यम से अब तक हिमालयी क्षेत्र में 72 टन कार्बन उत्सर्जन कम किया गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए पौधारोपण, जल संरक्षण एवं पर्यावरण जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए सौर ऊर्जा सहित अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के नौले, धारे एवं वर्षा आधारित नदियों जैसे परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण हेतु ‘स्प्रिंग एंड रिवर रिजुविनेशन अथॉरिटी (SARRA)’ का गठन किया गया है।


मुख्यमंत्री ने सभी से आह्वान किया कि जीवन के प्रत्येक प्रमुख अवसर—जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ या अन्य स्मरणीय दिन पर—एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करें, ताकि देवभूमि में पर्यावरण संरक्षण को सशक्त किया जा सके।


इस अवसर पर आरएसएस के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. दिनेश, आरएसएस प्रान्त प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र, विधायक विनोद चमोली, विधायक मुन्ना सिंह चौहान, विधायक बृजभूषण गैरोला, डॉ. कमलेश कुमार, उत्तरांचल उत्थान परिषद के संरक्षक प्रेम बड़ाकोटी, कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, रविदेवानंद सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।


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