विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन के साथ उत्तराखंड को आगे बढ़ाना प्राथमिकता: मुख्यमंत्री धामी
महिलाओं, युवाओं और स्थानीय उत्पादों को सशक्त बनाकर आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में आगे बढ़ रही सरकार; हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता के वैज्ञानिक आकलन पर जोर
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 25 Sep, 2026 05:51 PMहल्द्वानी, 25 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए उत्तराखंड को आगे बढ़ाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विकास की दिशा तय की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और साथ ही उत्तराखंड की संस्कृति, पहचान और पर्यावरण का संरक्षण भी सुनिश्चित हो।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को हल्द्वानी में एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र के कार्यक्रम में ‘उत्तराखंड: आशाएं और चुनौतियां’ विषय पर आयोजित विमर्श कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ करने के बाद संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने राज्य की विकास यात्रा, उपलब्धियों, संभावनाओं और भावी चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
बजट से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक राज्य ने की प्रगति
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और समय के साथ विकास की आवश्यकताएं एवं चुनौतियां भी बदलती रहती हैं। राज्य गठन के समय लगभग 4 हजार करोड़ रुपये से शुरू हुआ उत्तराखंड का बजट आज करीब 1.11 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और उद्यानिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में राज्य ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। उत्तराखंड तेजी से प्रमुख पर्यटन और फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में भी उभर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में होम-स्टे की संख्या में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसडीजी इंडिया इंडेक्स 2023-24 में उत्तराखंड और केरल संयुक्त रूप से प्रथम स्थान पर रहे हैं।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से स्थानीय उत्पादों को मिल रहा बाजार
मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों और महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और व्यापक बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य की महिलाएं सीमित संसाधनों में भी उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए 5 लाख रुपये तक के ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की गई है। महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़कर स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने के लिए कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि अनियमितताओं में शामिल 100 से अधिक लोगों के विरुद्ध गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरियों के साथ स्वरोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कुंभ-2027 की तैयारियों को लेकर सरकार सक्रिय
हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला-2027 की तैयारियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज, अखाड़ों, धार्मिक संगठनों और अन्य हितधारकों से प्राप्त सुझावों के आधार पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और कुंभ का आयोजन सुरक्षित, सुव्यवस्थित, भव्य एवं दिव्य रूप से संपन्न हो।
‘इकोलॉजी और इकॉनमी एक-दूसरे के पूरक’
उत्तराखंड के लिए अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन को बड़ी चुनौतियां बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इकोलॉजी और इकॉनमी को एक-दूसरे का पूरक बनाकर आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी एवं सर्वेक्षण को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का अर्थ केवल बड़ी परियोजनाओं का निर्माण नहीं है, बल्कि इसका वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा के साथ उत्तराखंड की संस्कृति, पहचान और देवभूमि की विशिष्टता को संरक्षित रखना भी आवश्यक है।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, सुरेश गड़िया, शिव अरोरा एवं प्रताप बिष्ट, हल्द्वानी-काठगोदाम के महापौर गजराज सिंह बिष्ट, काशीपुर के महापौर दीपक बाली, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मंजूनाथ टी.सी. समेत अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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