आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय था, लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष हमेशा प्रेरणादायी रहेगा: मुख्यमंत्री धामी

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Lucknow, 25 Jun, 2026 06:15 PM
आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय था, लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष हमेशा प्रेरणादायी रहेगा: मुख्यमंत्री धामी

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक काला अध्याय था, जब तत्कालीन सरकार ने सत्ता बचाने के लिए नागरिक स्वतंत्रताओं का हनन किया, प्रेस की आजादी पर अंकुश लगाया और संविधान की मूल भावना को गहरी चोट पहुंचाई।

गुरुवार को देहरादून में संविधान हत्या दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के त्याग, साहस और संघर्ष के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना संभव हो सकी। उन्होंने कहा कि इन सेनानियों का योगदान वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए उनके संघर्ष को सदैव स्मरण रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि The Emergency (India) के दौरान देशवासियों के मौलिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया, लेकिन जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक माध्यमों से इसका जवाब देते हुए लोकतंत्र को फिर स्थापित किया। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार प्रदान करता है, जिसकी रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में केंद्र सरकार सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को केंद्र में रखकर विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर रही है। अंत्योदय, राष्ट्र प्रथम, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूलमंत्र के आधार पर समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान और कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में लोकतंत्र सेनानियों की सम्मान निधि 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये प्रतिमाह की गई है। साथ ही आपातकाल के दौरान जेल गए लोकतंत्र सेनानियों और उनके आश्रित जीवनसाथियों को विशेष पहचान-पत्र भी जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के योगदान और संघर्ष की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने आह्वान किया कि लोकतंत्र की रक्षा, संविधान के सम्मान और राष्ट्र प्रथम की भावना को सर्वोपरि रखते हुए विकसित भारत और श्रेष्ठ उत्तराखंड के निर्माण में सभी को अपना योगदान देना चाहिए।

कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करते हुए उनके संघर्ष, योगदान और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना में निभाई गई भूमिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।


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