सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को लिखी 49वीं पाती, दीपोत्सव के जरिए दिया त्याग, सेवा और समरसता का संदेश

दसवें भव्य एवं दिव्य दीपोत्सव में परिवार और मित्रों के साथ अयोध्या पहुंचने का किया आग्रह, वंचित परिवारों की दीपावली रोशन करने और स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने की अपील

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Lucknow, 2 Nov, 2026 12:25 AM
सीएम योगी ने प्रदेशवासियों को लिखी 49वीं पाती, दीपोत्सव के जरिए दिया त्याग, सेवा और समरसता का संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम अपनी 49वीं पाती लिखकर दीपोत्सव के पावन अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। इस पाती के माध्यम से मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव को सनातन चेतना के पुनर्जागरण, सांस्कृतिक गौरव, त्याग, मर्यादा और समर्पण का महापर्व बताते हुए प्रदेशवासियों से इस उत्सव को सामाजिक सहभागिता और जनकल्याण की भावना के साथ मनाने का आह्वान किया है।



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में लिखा कि सप्तपुरियों में श्रेष्ठ श्री अयोध्या धाम अपने दसवें भव्य एवं दिव्य दीपोत्सव के स्वागत के लिए पुलकित है। उनकी हार्दिक इच्छा है कि प्रदेशवासी अपने परिवार और मित्रों के साथ प्रभु श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या पहुंचें और वहां आयोजित भव्य दीपोत्सव की दिव्य छटा के साक्षी बनें।

मुख्यमंत्री ने लिखा कि दीपोत्सव केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सनातन चेतना, परंपराओं और जीवन-मूल्यों से जुड़ा महापर्व है। यह पर्व प्रभु श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या आगमन की स्मृति से जुड़ा है। इस अवसर पर उन्होंने भरत जी के त्याग और समर्पण का उल्लेख करते हुए लिखा कि उन्होंने 14 वर्षों तक राजसुख का त्याग किया और प्रभु श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर प्रतिष्ठित रखकर शासन का संचालन किया।

मुख्यमंत्री ने इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया कि सत्ता का वास्तविक अर्थ अधिकार नहीं, बल्कि दायित्व और समर्पण है। भरत जी का जीवन त्याग, निष्ठा और मर्यादा का ऐसा आदर्श प्रस्तुत करता है, जिससे प्रत्येक व्यक्ति को प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि दीपोत्सव इन उच्च जीवन-मूल्यों को न केवल हमारी सांस्कृतिक चेतना में जीवंत कर रहा है, बल्कि विश्वपटल पर भी त्याग, मर्यादा और समर्पण की भारतीय परंपरा को प्रतिष्ठित कर रहा है।

अयोध्या के दीपोत्सव की भव्यता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि मां सरयू के तट पर सजी दीपमाला और राम की पैड़ी पर लाखों दीपों की जगमगाहट से ऐसा प्रतीत होता है, मानो आकाशगंगा धरती पर उतर आई हो। यह दृश्य भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक जनभागीदारी का अद्भुत प्रतीक है।

दीपोत्सव से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में दीपोत्सव के आर्थिक और रोजगारपरक महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि इस आयोजन से कुम्हारों, पुष्प विक्रेताओं, होटल व्यवसायियों और अन्य स्थानीय व्यापारियों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर सृजित होते हैं। दीपोत्सव आस्था और अर्थव्यवस्था के संगम का भी प्रतीक है।

उन्होंने लिखा कि आस्था और जनभागीदारी को विकास की शक्ति बनाकर उत्तर प्रदेश ने उत्सव प्रदेश के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित की है। मुख्यमंत्री ने विकास और समृद्धि के आपसी संबंध को रेखांकित करते हुए लिखा, “जहां प्रकाश है, वहां सुरक्षा का वास है। जहां सुरक्षा है, वहां निवेश के अवसर हैं। जहां निवेश है, वहां विकास है और जहां विकास है, वहीं रोजगार एवं सुख-समृद्धि है। समृद्धि से उत्सव और उत्सव से उत्सव प्रदेश का निर्माण होता है।”

इस प्रकार मुख्यमंत्री ने प्रकाश से सुरक्षा, सुरक्षा से निवेश, निवेश से विकास और विकास से रोजगार एवं समृद्धि तक की विकास यात्रा का संदेश दिया।

वंचित परिवारों की दीपावली रोशन करना ही दीपोत्सव की सच्ची भावना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से दीपावली को सामाजिक संवेदनशीलता और सेवा के भाव के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने लिखा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार वंचित परिवारों को दीपक, मिठाइयां और नए वस्त्र भेंट करने चाहिए, ताकि उनके जीवन में भी खुशियों का प्रकाश पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जरूरतमंद और वंचित परिवारों की दीपावली रोशन करना ही दीपोत्सव की सच्ची भावना है। उन्होंने स्थानीय कारीगरों के बनाए दीपक और अन्य उत्पाद खरीदने का भी आग्रह किया, जिससे उनके परिश्रम को प्रोत्साहन मिले और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्राप्त हो।

युवाओं को संदेश देते हुए मुख्यमंत्री ने लिखा कि उन्हें दीपक के प्रकाश की तरह सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ना चाहिए और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए। उन्होंने युवाओं से समाज में सकारात्मकता, सद्भाव और रचनात्मकता का वातावरण बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री की 49वीं पाती का मूल संदेश यही है कि दीपोत्सव केवल घरों और मंदिरों को दीपों से सजाने का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा, सांस्कृतिक गौरव, स्थानीय स्वावलंबन और सामूहिक समृद्धि का अवसर भी है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर प्रत्येक व्यक्ति समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में भी खुशियों का प्रकाश पहुंचाए, यही इस पावन पर्व की सार्थकता है।


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