श्रावण लोकमंगल, सेवा और प्रकृति संरक्षण का पावन पर्व: मुख्यमंत्री योगी

प्रदेशवासियों के नाम लिखी पाती में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामूहिकता का दिया संदेश

YUGVARTA NEWS

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Lucknow, 3 Aug, 2026 12:23 AM
श्रावण लोकमंगल, सेवा और प्रकृति संरक्षण का पावन पर्व: मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण माह के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम एक भावपूर्ण पाती लिखते हुए श्रावण को लोकमंगल, श्रम-सम्मान, सेवा, समरसता और प्रकृति संरक्षण का महापर्व बताया है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की आराधना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि संयम, सेवा, त्याग और सामाजिक समरसता का जीवन संदेश भी है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव द्वारा समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष का पान करना सर्वोच्च त्याग और लोककल्याण का प्रतीक है। श्रावण का महीना हमें यही प्रेरणा देता है कि समाज और प्रकृति के हित को सर्वोपरि रखते हुए सेवा एवं सहयोग की भावना के साथ जीवन जिया जाए।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में ग्रामीण संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रावण माह में धान की रोपाई के बाद होने वाला सहभोज सामूहिक श्रम, सामाजिक एकता और साझा संस्कृति का जीवंत उदाहरण है। यह परंपरा समाज को एकजुट करने के साथ-साथ परस्पर सहयोग और आत्मीयता का भी संदेश देती है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रावण केवल आध्यात्मिक साधना का ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और सहअस्तित्व का भी पर्व है। उन्होंने कहा कि पंचतत्वों में जल जीवन का मूल आधार है और इसका संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। जल संरक्षण तभी सफल होगा, जब इसमें जनभागीदारी सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की दिशा में व्यापक प्रयास किए हैं। प्रदेश में लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं, जो जल संचयन के साथ-साथ ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

उन्होंने लखनऊ की एक आवासीय सोसाइटी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां वर्षा जल संचयन के माध्यम से 50 हजार लीटर जल पुनर्भरण की सराहनीय पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायी हैं और हर नागरिक को जल संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से श्रावण माह को सेवा, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का अभियान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को हर बूंद पानी का सम्मान करना चाहिए, प्रत्येक पौधे की रक्षा करनी चाहिए और प्रकृति से जितना लें, उतना उसे लौटाने का भी संकल्प लेना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि श्रावण के पावन अवसर पर सेवा, संवेदनशीलता, पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता का यह संदेश उत्तर प्रदेश को सतत विकास और समृद्धि की दिशा में नई ऊर्जा प्रदान करेगा।


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