मुख्यमंत्री ने सुनाई मूक-बधिर बच्ची 'खुशी' की प्रेरक कहानी, बोले- हर दिव्यांगजन में प्रतिभा, बस चाहिए सही अवसर और सहयोग

90 किलोमीटर पैदल चलकर अकेले लखनऊ पहुंची थी कानपुर की ‘खुशी’, इलाज के बाद अब सुन भी रही, बोल भी रही, मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर सरकारी सहयोग से हुआ कॉक्लियर इम्प्लांट, ऑपरेशन पर लगभग छह से सात लाख रुपये का आता है खर्च

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Lucknow, 7 May, 2026 07:27 PM
मुख्यमंत्री ने सुनाई मूक-बधिर बच्ची 'खुशी' की प्रेरक कहानी, बोले- हर दिव्यांगजन में प्रतिभा, बस चाहिए सही अवसर और सहयोग

लखनऊ/कानपुर, 7 मई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के दौरान कानपुर की मूक-बधिर बच्ची “खुशी” की भावुक और प्रेरणादायक कहानी साझा कर पूरे सभागार को भावुक कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर दिव्यांगजन में प्रतिभा होती है, आवश्यकता केवल सही अवसर, संवेदना और सहयोग की है। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले कानपुर की एक बच्ची, जो न बोल सकती थी और न सुन सकती थी, सिर्फ उनसे मिलने और अपने हाथों से बनाया चित्र भेंट करने के लिए अकेले कानपुर से लखनऊ पहुंच गई थी। इलाज के बाद आज वह बच्ची सुन भी रही है, बोल भी रही है और सामान्य जीवन की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है।


मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, “मुझे याद है कानपुर की एक बिटिया की कहानी। एक दिन वह बिना किसी को बताए कानपुर से पैदल लखनऊ आ गई। विधान भवन के सामने वह चुपचाप बैठ गई। वह न बोल सकती थी, न सुन सकती थी। उसने अपने हाथ से मेरा एक छोटा सा चित्र बनाकर सामने रख लिया था।” मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के प्रशिक्षित शिक्षकों ने इशारों में उससे संवाद कर उसका परिवार ढूंढा और उसे वापस कानपुर भेजा। बाद में जब उन्हें इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने बच्ची को दोबारा बुलाकर उसके इलाज की व्यवस्था कराने के निर्देश दिए।


दरअसल, कानपुर की रहने वाली खुशी नवंबर 2025 में बिना बताए घर से निकलकर लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हुए लखनऊ पहुंच गई थी। विधान भवन के बाहर रोते हुए मिलने पर पुलिस उसे सुरक्षित थाने ले गई। जांच और चिकित्सकीय परीक्षण में सामने आया कि बच्ची को सुनने के लिए कॉक्लियर इम्प्लांट की आवश्यकता है। इस ऑपरेशन पर लगभग छह से सात लाख रुपये का खर्च आना था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर समाज कल्याण विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और एक फाउंडेशन के सहयोग से उसके इलाज की पूरी व्यवस्था कराई गई।

26 जनवरी 2026 को खुशी का कॉक्लियर इम्प्लांट ऑपरेशन किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा। अब खुशी आवाजें सुन पा रही है और उसने टूटे-फूटे शब्दों में बोलना भी शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उसके मुंह से निकले पहले शब्द थे- “थैंक यू योगी जी।” डॉक्टरों के अनुसार नियमित स्पीच थैरेपी और अभ्यास के बाद आने वाले कुछ महीनों में उसकी बोलने की क्षमता और बेहतर होगी तथा एक वर्ष के भीतर वह सामान्य बच्चों की तरह बातचीत कर सकेगी।


मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि अगर हम दिव्यांगजनों के साथ भेदभाव करते हैं तो यह अन्याय है। हर व्यक्ति में प्रतिभा होती है, बस सही अवसर और सहयोग चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि ऑपरेशन के बाद खुशी ने सबसे पहले उस पुलिस इंस्पेक्टर का चित्र बनाकर उन्हें भेंट किया, जिन्होंने लखनऊ में उसकी मदद की थी। उन्होंने कहा कि कृतज्ञता का यह भाव समाज को संवेदनशील बनाने की प्रेरणा देता है। खुशी की कहानी इन्हीं प्रयासों का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है।

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