तेल आयात बहाल करने के लिए मध्य पूर्व में भारत की आक्रामक ऊर्जा कूटनीति
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 13 Apr, 2026 01:12 PMनई दिल्ली : "मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए आक्रामक कूटनीति अपनाई है। तेल और गैस आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए भारत सक्रिय रूप से खाड़ी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, ताकि तेल आयात बहाल और स्थिर रखा जा सके। हालिया घटनाक्रम में भारत के पेट्रोलियम मंत्री ने कतर सहित कई प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देशों के साथ बातचीत की, जहां दीर्घकालिक आपूर्ति और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। कतर ने भी भारत को भरोसेमंद ऊर्जा साझेदार बताते हुए आपूर्ति जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।
दरअसल, मध्य पूर्व में संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अस्थिरता के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है और पहले लगभग 40% तेल मध्य पूर्व से आता था। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए विभिन्न देशों से तेल आयात बढ़ाया और सप्लाई स्रोतों का विविधीकरण किया है।
इसके अलावा, भारत घरेलू स्तर पर एलपीजी और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को भी मजबूत कर रहा है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर आम जनता पर कम पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह आक्रामक ऊर्जा कूटनीति न केवल वर्तमान संकट से निपटने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगी।


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