सीमाओं की सुरक्षा के लिए बनेगा मजबूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड, 3 साल में नारकोटिक्स पर निर्णायक प्रहार होगा: अमित शाह
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 10 Jul, 2026 08:32 AMनई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित सीमांत जिला पुलिस अधीक्षक सम्मेलन-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक, तकनीक आधारित और समग्र बनाने के लिए केंद्र सरकार व्यापक स्तर पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन ने समग्र सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण को संस्थागत स्वरूप प्रदान किया है और भविष्य में तटीय सीमा सुरक्षा को भी इसी समग्र सोच के साथ और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि सम्मेलन में सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों, उनके समाधान और भविष्य की नीतिगत रणनीति पर गंभीर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार, सीमा सुरक्षा बलों, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, केंद्र सरकार के विभिन्न हितधारकों तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों के समन्वय से एक मजबूत चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड तैयार कर रही है, जिससे सीमा सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट बॉर्डर की अवधारणा के अनुरूप भारत की सीमा सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में दुनिया की सबसे आधुनिक व्यवस्थाओं में शामिल होगी। उनके अनुसार, सुरक्षित सीमा, समृद्ध सीमांत क्षेत्र और जागरूक समाज ही देश की समग्र सुरक्षा की आधारशिला हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में आतंकवाद तथा नक्सलवाद के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उन्होंने इसे केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों का परिणाम बताया।
नारकोटिक्स के खिलाफ अभियान का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार अगले तीन वर्षों में मादक पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क को गंभीर क्षति पहुंचाकर इस समस्या पर निर्णायक विजय प्राप्त करने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि देश को घुसपैठ से मुक्त बनाने और भविष्य में किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए एक मजबूत और स्थायी तंत्र विकसित किया जा रहा है। उनके अनुसार, पहले समस्याएं स्थायी होती थीं और समाधान अस्थायी, लेकिन मोदी सरकार समस्याओं की जड़ पर प्रहार कर स्थायी समाधान सुनिश्चित कर रही है।
अमित शाह ने बताया कि मोदी सरकार ने सीमा क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विकास में 400 प्रतिशत वृद्धि की है और वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टिकोण के साथ सीमा सुरक्षा को नई मजबूती दी है।
उन्होंने वाइब्रेंट विलेज्स कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के अंतिम गांव को “प्रथम गांव” का दर्जा देने की सोच विकसित की है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सीमावर्ती गांवों में पलायन रोकने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने डेमोग्राफी मिशन की शुरुआत की है, जिसके तहत जनसांख्यिकी परिवर्तन का अध्ययन किया जाएगा, असामान्य कारणों से हो रही जनसंख्या वृद्धि की पहचान की जाएगी और उसे रोकने के लिए प्रभावी उपाय सुझाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि जनसांख्यिकी में असामान्य कारणों से होने वाले बदलावों को सख्त और प्रभावी रणनीति के माध्यम से रोका जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में हो रहे जनसांख्यिकी परिवर्तन का प्रमुख कारण घुसपैठ है। इसी चुनौती से निपटने के लिए मोदी सरकार ने चतुष्कोणीय सुरक्षा ग्रिड विकसित किया है, जिसके माध्यम से सीमा सुरक्षा की रणनीति को रिएक्टिव के बजाय प्रोएक्टिव बनाया गया है।
अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों, आधुनिक तकनीक तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता से भारत की सीमाएं और अधिक सुरक्षित होंगी तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।



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