ओम (ॐ): मात्र एक ध्वनि नहीं, ब्रह्मांडीय ऊर्जा और न्यूरोसाइंस का अद्भुत संगम

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Lucknow, 24 Jan, 2026 10:51 PM
ओम (ॐ): मात्र एक ध्वनि नहीं, ब्रह्मांडीय ऊर्जा और न्यूरोसाइंस का अद्भुत संगम

-विजय दीक्षित, वरिष्ठ संपादक, अमृत बाजार पत्रिका/युगांतर समूह, कोलकाता

​भारतीय मनीषा ने सदियों पूर्व जिस सत्य को अपनी अंतर्दृष्टि से खोज लिया था, आज आधुनिक विज्ञान उसे अपनी प्रयोगशालाओं में सिद्ध कर रहा है। 'ओम' (Om) केवल किसी संप्रदाय विशेष का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह वह 'नाद' (ध्वनि) है जो मानव मस्तिष्क की न्यूरोलॉजी और शरीर की फिजियोलॉजी को सकारात्मक रूप से बदलने की क्षमता रखता है। आइए, इस प्राचीन ध्वनि के वैज्ञानिक, शारीरिक और आध्यात्मिक पहलुओं का समग्र विश्लेषण करें।


​न्यूरोसाइंस: मस्तिष्क की शांति का विज्ञान


आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) सबसे बड़ा शत्रु है। यहाँ 'ओम' एक दवा की तरह काम करता है।

भारत के प्रतिष्ठित संस्थान 'निम्हांस' (NIMHANS) ने अपने अध्ययन में पाया है कि 'ओम' का लयबद्ध उच्चारण मस्तिष्क के 'लिम्बिक सिस्टम' (Limbic System) को प्रभावित करता है। यह हमारे दिमाग का वह हिस्सा है जो भावनाओं, भय और क्रोध को नियंत्रित करता है। एफएमआरआई (fMRI) स्कैन पुष्टि करते हैं कि इस ध्वनि के उच्चारण से मस्तिष्क की उत्तेजना शांत होती है, जिसे विज्ञान 'रिलैक्सेशन रिस्पॉन्स' कहता है। यह प्रक्रिया पैरा-सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करती है, जिससे मन गहरे विश्राम की अवस्था में चला जाता है।


​फिजियोलॉजी : 'वेगस नर्व' और आरोग्य


चिकित्सा विज्ञान अब 'ध्वनि चिकित्सा' (Sound Medicine) को गंभीरता से ले रहा है। हमारे शरीर में 'वेगस नर्व' (Vagus Nerve) एक महत्वपूर्ण महा-शिरा है जो मस्तिष्क को हृदय, फेफड़ों और पाचन तंत्र से जोड़ती है।


शोध बताते हैं कि 'ओम' का उच्चारण—विशेषकर गले और सीने में होने वाला कंपन—इस वेगस नर्व को उत्तेजित (Stimulate) करता है। इसका सीधा असर हमारे हृदय पर पड़ता है; ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है और हार्ट रेट सामान्य होती है।


​इसके अलावा, स्वीडन के 'कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट' के एक अध्ययन के अनुसार, जब हम 'ओम' के अंत में 'म...' (Humming) की ध्वनि करते हैं, तो नासिका मार्ग में 'नाइट्रिक ऑक्साइड' का उत्पादन 15 गुना बढ़ जाता है। यह गैस रक्त वाहिकाओं को फैलाने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ाने के लिए अनिवार्य है।


​दर्शन: चेतना के तीन स्तर-


माण्डूक्य उपनिषद में 'ओम' की दार्शनिक व्याख्या अत्यंत वैज्ञानिक है। यह तीन अक्षरों से मिलकर बना है— अ, उ, और म।

​'अ' (A): जाग्रत अवस्था (Waking State) का प्रतीक है।

​'उ' (U): स्वप्न अवस्था (Dreaming State) का प्रतीक है।

​'म' (M): सुसुप्ति अवस्था (Deep Sleep) का प्रतीक है।

इन तीनों का मिलन ही वह 'तुरीय' अवस्था है जहाँ मनुष्य परम शांति और संतुलन को प्राप्त करता है। यह केवल पूजा-पाठ का विषय नहीं, बल्कि मनोविज्ञान (Psychology) का एक गहरा सिद्धांत है जो चेतना (Consciousness) को समझने में मदद करता है।


​भौतिकी : कंपन का सिद्धांत (Law of Vibration)

महान वैज्ञानिक निकोला टेस्ला ने कहा था, "यदि आप ब्रह्मांड के रहस्यों को समझना चाहते हैं, तो ऊर्जा, आवृत्ति और कंपन (Vibration) के संदर्भ में सोचें।"

पूरा ब्रह्मांड कंपायमान है। जब हम 'ओम' का उच्चारण करते हैं, तो हम शरीर के भीतर एक ऐसी आवृत्ति (Frequency) उत्पन्न करते हैं जो प्रकृति की लय के साथ तालमेल बिठाती है। यह शरीर के बिखरे हुए बायो-रिदम (Bio-rhythm) को पुन: व्यवस्थित (Re-align) करने की प्रक्रिया है।


सही उच्चारण की वैज्ञानिक विधि-

​अधिकतम स्वास्थ्य लाभ के लिए 'ओम' के उच्चारण का अनुपात 1:1:2 होना चाहिए:

​'अ' (A): इसकी ध्वनि नाभि (Solar Plexus) से आनी चाहिए। यह शरीर के निचले हिस्से में कंपन पैदा करता है।

​'उ' (U): यह ध्वनि छाती (Thoracic region) से गूंजनी चाहिए। यह फेफड़ों और हृदय को सक्रिय करती है।

​'म' (M): होंठ बंद करके भँवरे जैसा गुंजन। यह सबसे लंबा होना चाहिए। यह कंपन मस्तिष्क और कपाल (Cranial region) में महसूस होता है, जो मानसिक तनाव को हर लेता है।


निष्कर्ष-

'ओम' को सिद्ध करने के लिए हमें किसी पश्चिमी संस्था के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है। हमारे ऋषियों ने इसे 'प्रणव' कहा है—यानी वह जो प्राणों को नया जीवन दे। चाहे आप इसे 'शिव का डमरू' मानें या 'वेगस नर्व स्टिमुलेशन', परिणाम एक ही है—शारीरिक आरोग्यता और मानसिक शांति। यह भारत का विश्व को दिया गया वह अमूल्य उपहार है, जो धर्म से परे पूरी मानवता के कल्याण के लिए है।



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