एक तिरंगा, 54 देश, अखंड सफरः 'सूर्यपथ रिले' से दिखा भारत का बढ़ता प्रभाव

YUGVARTA NEWS

YUGVARTA NEWS

Lucknow, 17 Aug, 2026 10:48 PM
एक तिरंगा, 54 देश, अखंड सफरः 'सूर्यपथ रिले' से दिखा भारत का बढ़ता प्रभाव

नई दिल्ली। जब दुनिया भर के विभिन्न टाइम ज़ोन में घड़ियों की सुइयां 15 अगस्त की तारीख को छू रही थीं, तब भारत की सांस्कृतिक कूटनीति के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा जा रहा था। समय की सीमाओं को लांघकर और भौगोलिक दूरियों को समेटकर भारतीय राष्ट्रध्वज ने जब 'सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले' के रूप में अपनी यात्रा शुरू की, तो यह महज एक कूटनीतिक आयोजन नहीं, दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभाव का एक प्रमाण था, जो विश्व को शांति, विकास और अखंडता के सूत्र में पिरोने की ताकत रखता है। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारत की सीमाओं से बाहर अपनी तरह की पहली 'सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले' पूरी हुई। इस यात्रा में पूर्व में फिजी से लेकर पश्चिम में अमेरिका तक, 54 देशों और कई टाइम ज़ोन को कवर किया गया। मंत्रालय ने बताया फिजी में भारत के उच्चायोग से शुरू हुई इस रिले ने एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिरंगे की भावना को आगे बढ़ाया और दुनिया भर में भारतीय समुदाय और भारत के दोस्तों को एक साथ जोड़ा। इस अनोखे अभियान का मुख्य उद्देश्य वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक साख को मजबूत करना और आपसी सहयोग को बढ़ाना था। इस अनूठी यात्रा का ताना-बाना विदेश मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत बुना गया था। सूर्य की पहली किरण के साथ तिरंगे का यह सफर प्रशांत महासागर में स्थित फिजी की राजधानी सुवा से आरंभ हुआ। इसके बाद, समय की गति के साथ कदमताल करते हुए यह गौरवमयी कारवां न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी देशों और यूरोप से होते हुए आगे बढ़ता रहा। लगभग 19 घंटे की इस लगातार यात्रा के दौरान दुनिया के 54 प्रमुख राजनयिक मिशनों ने एक-एक करके सिलसिलेवार ढंग से ध्वजारोहण किया। इस ऐतिहासिक रिले का समापन अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित सैन फ्रांसिस्को में भारत के महावाणिज्य दूतावास में हुआ। तिरंगा रिले की यह गूंज भविष्य के एक दूरगामी वैश्विक प्रभाव की ओर इशारा करती है। विभिन्न महाद्वीपों के देशों को एक सूत्र में पिरोने वाली इस यात्रा ने साबित कर दिया है कि भारत की सांस्कृतिक साख आज सीमाओं से परे जाकर 'ग्लोबल साउथ' की एक मजबूत आवाज बन चुकी है। यह भव्य प्रदर्शन आने वाले समय में दुनिया भर में रह रहे करोड़ों प्रवासी भारतीयों के मन में अपनी मातृभूमि के प्रति गौरव के भाव को और गहरा करेगा। साथ ही, यह 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने के लिए उन्हें आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर एक नया भावनात्मक संबल भी प्रदान करेगा। (रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

सर्वाधिक पसंद

Leave a Reply

comments

Loading.....
  1. No Previous Comments found.

moti2