भारत का भविष्य: क्या 2050 में 'दिन' में लगेगा कर्फ्यू और 'रात' में दौड़ेगी अर्थव्यवस्था?
2047 का भारत: 'सूर्यवंशी' देश को बनना पड़ेगा 'निशाचर', ऑक्सफोर्ड की रिपोर्ट ने दिया बड़े बदलाव का संकेत
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 30 Jan, 2026 11:31 PMक्या आने वाले वक्त में भारत की घड़ियाँ उल्टी चलेंगी? क्या 2050 तक हमें अपनी जीवनशैली को पूरी तरह पलटकर 'दिन में नींद और रात में काम' (Night Shift Nation) के मॉडल पर जाना होगा? ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की हालिया रिपोर्ट और भारत की बदलती जलवायु केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था (GDP) के अस्तित्व का सवाल है।
प्रस्तुति विजय दीक्षित,सीनियर एडिटर,
अमृत बाजार पत्रिका/ युगान्तर समूह कोलकाता की कलम से।
इंदौर प्रवास के दौरान ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के स्मिथ स्कूल ऑफ एंटरप्राइज एंड एनवायरनमेंट की रिपोर्ट का विश्लेषण करने पर एक भयावह लेकिन व्यावहारिक तस्वीर उभरती है। रिपोर्ट बताती है कि 2050 तक भारत दुनिया का सबसे तप्त (Heat Stressed) देश होगा। लेकिन इस समस्या का समाधान केवल एयर कंडीशनर (AC) नहीं, बल्कि 'समय का प्रबंधन' है।
नया भारत: दिन में सन्नाटा, रात में बाजार
हम सदियों से मानते आए हैं कि काम दिन में होता है और आराम रात में। लेकिन जब दिन का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस को छूएगा, तो यह परंपरा निभानी भारी पड़ेगी।
शिफ्ट होगी दिनचर्या: स्पेन जैसे देशों में 'सिएस्टा' (दोपहर का आराम) होता है, लेकिन भारत को इससे आगे जाना होगा। 2035-40 तक भारत में निर्माण कार्य, कृषि मंडियां, ट्रांसपोर्ट और यहाँ तक कि रिटेल बाजार भी शाम 6 बजे से सुबह 4 बजे तक संचालित करने की मजबूरी होगी।
मजबूरी या अवसर?
यह बदलाव केवल गर्मी से बचने के लिए नहीं, बल्कि ऊर्जा प्रबंधन के लिए भी होगा। रात में तापमान कम होने से AC की दक्षता (Efficiency) बढ़ेगी और बिजली ग्रिड पर लोड कम होगा।
GDP पर गर्मी की मार: आंकड़ों का खेल
गर्मी और जीडीपी का रिश्ता सीधा है—इंसानी शरीर एक मशीन है, और हर मशीन की एक थर्मल लिमिट होती है।
उत्पादकता का ह्रास: लेइसेट (Lancet) की रिपोर्ट और मेरे पुराने विश्लेषणों को मिलाएँ, तो पता चलता है कि भीषण गर्मी के कारण भारत हर साल अपने कुल काम के घंटों का 5-7% हिस्सा खो सकता है। यह सीधे तौर पर GDP में 4.5% तक की गिरावट ला सकता है। अगर मजदूर दिन में काम नहीं कर पाएगा, और हमने रात का विकल्प नहीं दिया, तो इकोनॉमी का पहिया जाम हो जाएगा।
महंगाई का चक्र
जब लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन दिन की गर्मी में ठप पड़ेंगे, तो सब्जियों और जरूरी सामानों की कीमतें आसमान छुएंगी। यह 2047 के 'विकसित भारत' के लक्ष्य के लिए सबसे बड़ा रोड़ा है।
क्या टेक्नोलॉजी नहीं बचाएगी? (भ्रम और यथार्थ)
अक्सर तर्क दिया जाता है कि 2050 तक टेक्नोलॉजी इतनी उन्नत हो जाएगी कि गर्मी बेअसर हो जाएगी। लेकिन यहाँ पेंच है।
फिजिकल लिमिट
तकनीक AC को बेहतर बना सकती है, लेकिन वह खुले आसमान के नीचे काम करने वाले किसान या मजदूर के शरीर को ठंडा नहीं कर सकती। जब 'वेट बल्ब तापमान' 35 डिग्री से ऊपर जाता है, तो पसीना सूखना बंद हो जाता है और शरीर अंदर से उबलने लगता है। कोई भी ऐप या सॉफ्टवेयर इसे नहीं बदल सकता।
कूलिंग का विरोधाभास: हम जितनी कूलिंग मशीनें (AC/Chillers) बढ़ाएंगे, वे उतनी ही गर्मी बाहर फेंकेंगी। यानी तकनीक शहर को और गर्म करेगी।
2047 मिशन के लिए सलाह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 के विजन को अगर गर्मी की लपटों से बचाना है, तो हमें आज से ही 'नेशनल टाइम जोन पॉलिसी' और इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव करने होंगे:
'नाइट इकोनॉमी' को कानूनी मान्यता
श्रम कानूनों में बदलाव कर 'नाइट शिफ्ट' को मुख्यधारा में लाया जाए। इसके लिए रात में सुरक्षा, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और लाइटिंग की व्यवस्था युद्ध स्तर पर करनी होगी।
हाइब्रिड वर्क कल्चर
कॉरपोरेट जगत को गर्मियों के 4 महीनों (अप्रैल-जुलाई) के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' या 'फ्लेक्सिबल आवर्स' को अनिवार्य करना होगा।
विकेंद्रीकृत कूलिंग
जैसा कि मैंने पहले भी कहा था, हर घर में AC के बजाय पूरे मोहल्ले के लिए एक सेंट्रलाइज्ड कूलिंग प्लांट (District Cooling) ही एकमात्र रास्ता है। यह बिजली की खपत आधी कर देगा।
अंत में…
प्रकृति ने अपनी चेतावनी दे दी है। अब चुनाव हमारा है। हम या तो गर्मी से लड़कर अपनी ऊर्जा और जीडीपी बर्बाद करें, या फिर समय के साथ तालमेल बिठाकर भारत को '24 घंटे जागने वाला देश' बना दें। 2050 का भारत वही सफल होगा, जो धूप ढलने के बाद अपनी रफ्तार पकड़ेगा।
-विजय दीक्षित


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