बिश्केक में मोदी की कूटनीति तेज, SCO में भारत के हितों पर नजर
पेजेशकियन और पुतिन से अहम बातचीत, झापारोव-पाशिन्यान से भी संवाद; 1 सितंबर को 26वें SCO शिखर सम्मेलन में रखेंगे भारत का दृष्टिकोण
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 31 Aug, 2026 11:24 PM-आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, प्रबंध संपादक
बिश्केक, 31 अगस्त 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में हैं, जहां 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को लेकर शीर्ष स्तर की कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं। मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की यात्रा पर हैं। हालांकि राष्ट्राध्यक्षों की औपचारिक SCO बैठक 1 सितंबर को होगी, लेकिन सम्मेलन से पहले ही प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकातें कर भारत के रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने का सिलसिला शुरू कर दिया है।
बिश्केक पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और भारतीय समुदाय के लोगों से संवाद किया। इसके बाद उनकी गतिविधियों में ईरान, रूस, आर्मेनिया और मेजबान किर्गिस्तान के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत प्रमुख रही। 1 सितंबर को वह SCO के मुख्य शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
31 अगस्त को मोदी की अहम मुलाकातें
पेजेशकियन से बातचीत, पश्चिम एशिया पर नजर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO से इतर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए भारत के उस स्थायी रुख को दोहराया कि समस्याओं का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए।
वार्ता में समुद्री आवाजाही और व्यापार की स्वतंत्रता का मुद्दा भी प्रमुख रहा। नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों, नाविकों और नागरिक ढांचे की सुरक्षा को लेकर भारत ने अपनी चिंता रखी। दोनों नेताओं के बीच BRICS और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को आगे बढ़ाने को लेकर भी चर्चा हुई।
पुतिन से मुलाकात, भारत-रूस संबंधों की समीक्षा
मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी बिश्केक में मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क समेत द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
बातचीत ऐसे समय हुई है जब रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की परिस्थितियों का वैश्विक व्यापार तथा ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव पड़ रहा है। भारत लगातार संघर्षों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता रहा है। दोनों नेताओं ने आगामी BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर भी विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री ने पुतिन को सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है।
झापारोव के साथ रणनीतिक साझेदारी पर जोर
मेजबान देश किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर झापारोव के साथ बैठक में भारत-किर्गिस्तान संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने आर्थिक एवं वाणिज्यिक सहयोग बढ़ाने, निवेश के अवसर तलाशने और दोनों देशों की परस्पर पूरक क्षमताओं का इस्तेमाल करने पर जोर दिया।
शिक्षा, छात्र आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संपर्कों के जरिए लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने किर्गिस्तान की SCO अध्यक्षता और शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए राष्ट्रपति झापारोव को बधाई दी।
पाशिन्यान से मुलाकात, कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा
आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के साथ मोदी की बैठक में रक्षा, अर्थव्यवस्था, फार्मास्यूटिकल्स, खनन, शिक्षा, संस्कृति, सूचना प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विचार हुआ।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया सहित विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। पाशिन्यान ने आर्मेनिया-अजरबैजान शांति प्रक्रिया से जुड़े घटनाक्रमों की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी को दी। दोनों पक्षों ने आपसी हित वाले क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।
SCO से पहले उज्बेकिस्तान में भी बड़ा कूटनीतिक कदम
बिश्केक पहुंचने से पहले मोदी 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर थे। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के साथ बातचीत में दोनों देशों के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति बनी।
भारत और उज्बेकिस्तान ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 5 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। बुनियादी ढांचे, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
मोदी को उज्बेकिस्तान के विदेशी नेताओं को दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘ओली दाराजली दोस्तलिक’ से सम्मानित किया गया।
क्या है शंघाई सहयोग संगठन?
‘शंघाई फाइव’ से बना बड़ा यूरेशियाई मंच
शंघाई सहयोग संगठन की शुरुआत 1996 में ‘शंघाई फाइव’ के रूप में हुई थी। इसमें चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल थे। इसका मूल उद्देश्य सोवियत संघ के विघटन के बाद मध्य एशियाई सीमाओं से जुड़े विवादों को कम करना, आपसी विश्वास बढ़ाना और सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य तनाव घटाना था।
साल 2000 में उज्बेकिस्तान इस व्यवस्था में शामिल हुआ। इसके बाद 15 जून 2001 को चीन के शंघाई शहर में छह देशों ने औपचारिक रूप से शंघाई सहयोग संगठन के गठन की घोषणा की।
SCO के चार्टर पर 7 जून 2002 को हस्ताक्षर किए गए और यह 19 सितंबर 2003 से प्रभावी हुआ।
समय के साथ संगठन का दायरा सुरक्षा से आगे बढ़कर व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, डिजिटल सहयोग, संस्कृति और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तक फैल गया।
SCO में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
10 पूर्ण सदस्य देशों का संगठन
वर्तमान में SCO के 10 पूर्ण सदस्य देश हैं—भारत, चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस।
भारत और पाकिस्तान 2017 में संगठन के पूर्ण सदस्य बने। ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में पूर्ण सदस्य बना।
अफगानिस्तान और मंगोलिया पर्यवेक्षक देशों के रूप में जुड़े हैं। इसके अलावा कई देश संवाद साझेदार की भूमिका में SCO से जुड़े हुए हैं।
आर्थिक ताकत कितनी बड़ी है?
वैश्विक GDP और व्यापार में बड़ा हिस्सा
SCO के सदस्य देशों की संयुक्त आबादी 3.4 अरब से अधिक है। इन देशों का कुल क्षेत्रफल यूरेशिया के बड़े हिस्से में फैला हुआ है और करीब 3.6 करोड़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है।
संगठन के सदस्य देश मिलकर वैश्विक GDP में करीब 25 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इनकी हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है।
यही वजह है कि SCO अब केवल सुरक्षा संबंधी चर्चाओं का मंच नहीं रह गया है। ऊर्जा, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल अर्थव्यवस्था और परिवहन गलियारों से जुड़े फैसलों का प्रभाव व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र पर पड़ सकता है।
सैन्य और सुरक्षा के लिहाज से कितना ताकतवर?
NATO जैसा गठबंधन नहीं, फिर भी बेहद प्रभावशाली
SCO को NATO की तरह सामूहिक सैन्य गठबंधन नहीं माना जाता। संगठन की अपनी कोई एकीकृत सेना नहीं है। इसके बावजूद इसमें चीन, रूस और भारत जैसी बड़ी सैन्य शक्तियां तथा भारत और पाकिस्तान जैसे परमाणु-सशस्त्र देश शामिल हैं।
SCO का सुरक्षा एजेंडा मुख्य रूप से आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ से निपटने पर केंद्रित है। इसके लिए संगठन के पास रीजनल एंटी-टेररिस्ट स्ट्रक्चर यानी RATS का विशेष ढांचा मौजूद है।
RATS सदस्य देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान, समन्वय और आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बिश्केक सम्मेलन में किन मुद्दों पर रहेगा जोर?
पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन संघर्ष पर चर्चा
SCO शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय परिवहन मार्गों पर पड़ रहा है। ऐसे में सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय संघर्षों और उनके व्यापक प्रभावों पर चर्चा अहम रहेगी।
आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा
आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ SCO के मूल सुरक्षा एजेंडे में शामिल हैं। सम्मेलन में RATS के तहत सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को प्रभावी बनाने पर चर्चा होगी।
सदस्य देश आतंकवाद और चरमपंथ से मुक्त क्षेत्र बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरा सकते हैं।
अफगानिस्तान भी एजेंडे में
अफगानिस्तान SCO के लिए लगातार महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी, सीमा पार अपराध और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरे मध्य एशियाई देशों के लिए बड़ी चुनौती हैं।
इसलिए अफगानिस्तान से जुड़े सुरक्षा और स्थिरता के मुद्दे सम्मेलन की चर्चाओं में प्रमुख स्थान रख सकते हैं।
SCO विकास बैंक पर बढ़ी उम्मीदें
SCO विकास बैंक की स्थापना लंबे समय से संगठन के आर्थिक एजेंडे का हिस्सा रही है। सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने तथा वित्तीय सहयोग को आसान बनाने के लिए इसके ढांचे और कामकाज को लेकर चर्चा आगे बढ़ रही है।
भारत के लिए भी ऐसा संस्थागत वित्तीय ढांचा महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय परियोजनाओं और कनेक्टिविटी योजनाओं में सहयोग के नए अवसर बन सकते हैं।
परिवहन गलियारों पर भी नजर
भारत के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी INSTC विशेष महत्व रखता है। यह भारत को ईरान के रास्ते रूस और व्यापक यूरेशियाई बाजारों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण परिवहन नेटवर्क है।
पश्चिम एशिया में समुद्री मार्गों पर बढ़ते दबाव के बीच ऐसे वैकल्पिक व्यापार मार्गों की उपयोगिता और बढ़ गई है। यूरेशिया में माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए अन्य परिवहन नेटवर्क को विकसित करने पर भी चर्चा हो सकती है।
भारत के लिए SCO सम्मेलन क्यों अहम?
BRICS शिखर सम्मेलन से पहले कूटनीतिक जमीन तैयार
बिश्केक सम्मेलन के कुछ ही दिनों बाद भारत नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। ऐसे में SCO मंच भारत को रूस, चीन, ईरान और मध्य एशियाई देशों के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत का अवसर दे रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी की पुतिन और पेजेशकियन से हुई मुलाकातें आगामी BRICS बैठक के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
ईरान के साथ संबंधों का रणनीतिक महत्व
भारत के लिए ईरान पश्चिम एशिया और मध्य एशिया तक पहुंच का महत्वपूर्ण साझेदार है। चाबहार बंदरगाह और INSTC जैसी परियोजनाएं भारत की दीर्घकालिक कनेक्टिविटी और व्यापार रणनीति से जुड़ी हैं।
ऐसे में ईरान के साथ सीधे शीर्षस्तरीय संवाद के जरिए क्षेत्रीय तनाव, समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा भारत के लिए महत्वपूर्ण है।
रूस के साथ ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी
रूस भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक और ऊर्जा साझेदार है। पुतिन के साथ मोदी की बातचीत में रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और आर्थिक सहयोग जैसे विषयों की समीक्षा हुई।
वैश्विक संघर्षों और बदलते व्यापारिक समीकरणों के बीच भारत-रूस संबंधों को स्थिर और मजबूत बनाए रखना नई दिल्ली की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
चीन के साथ संवाद पर भी नजर
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग भी बिश्केक में मौजूद हैं। हालांकि 31 अगस्त की रात तक मोदी और शी चिनफिंग के बीच किसी औपचारिक द्विपक्षीय बैठक की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसके बावजूद दोनों नेताओं की एक ही बहुपक्षीय मंच पर मौजूदगी महत्वपूर्ण है। भारत-चीन संबंधों में पिछले वर्षों के तनाव के बाद दोनों देशों के बीच संवाद और संबंधों में सुधार की प्रक्रिया पर SCO के दौरान भी नजर रहेगी।
मध्य एशिया में भारत की पकड़ मजबूत करने का मौका
उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा के जरिए भारत ने मध्य एशिया को अपनी विदेश नीति में दिए जा रहे महत्व का संकेत दिया है।
व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा, डिजिटल तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक संपर्कों के जरिए भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को और व्यापक बनाना चाहता है।
UNSC सीट की दावेदारी भी महत्वपूर्ण
भारत 2028-29 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की गैर-स्थायी सीट की दावेदारी कर रहा है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सीट के लिए ताजिकिस्तान भी दावेदार है। ऐसे में मध्य एशियाई देशों के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध इस चुनावी प्रयास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
1 सितंबर को मुख्य शिखर सम्मेलन
SCO का मुख्य राष्ट्राध्यक्ष स्तर का शिखर सम्मेलन 1 सितंबर को बिश्केक में होगा। इसमें सदस्य देशों के नेता क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, आर्थिक सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी और वैश्विक घटनाक्रम से जुड़े मुद्दों पर विचार करेंगे।
भारत के लिए इस सम्मेलन का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि नई दिल्ली एक साथ कई रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ा रही है—मध्य एशिया से मजबूत संबंध, रूस और ईरान के साथ सहयोग, चीन के साथ संवाद, आतंकवाद के खिलाफ क्षेत्रीय समन्वय और आगामी BRICS शिखर सम्मेलन की तैयारी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बिश्केक यात्रा इसी व्यापक कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है। SCO के मंच पर भारत का जोर सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी, क्षेत्रीय एकता और सभी देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर रहेगा। 1 सितंबर का शिखर सम्मेलन यह तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा कि इन मुद्दों पर सदस्य देश किस साझा दिशा में आगे बढ़ते हैं।
-आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, प्रबंध संपादक



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