संसद में भगवा वस्त्र पहनकर विरोध पर बवाल, VHP और संत समाज ने जताई कड़ी आपत्ति; विपक्षी सांसदों के निष्कासन की मांग
राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों पर विपक्ष के प्रदर्शन को बताया धार्मिक भावनाओं का अपमान, राष्ट्रपति और लोकसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की अपील
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 31 Jul, 2026 10:38 PMनई दिल्ली। संसद परिसर में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर विपक्षी सांसदों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और अयोध्या के कई प्रमुख संतों एवं धार्मिक संगठनों ने इस प्रदर्शन की कड़ी निंदा करते हुए इसमें शामिल सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उनकी संसद सदस्यता समाप्त करने की मांग की है।
दरअसल, संसद के मकर द्वार के बाहर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव (राजेश रंजन) सहित कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कई सांसदों ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सांसदों ने “चढ़ावा चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए।
प्रदर्शन के दौरान एक सांकेतिक नाट्य प्रस्तुति (स्किट) भी की गई। इसमें भगवा वस्त्र पहने पप्पू यादव दानपेटियों के पास बैठे, जबकि अन्य सांसदों ने दानपेटियों में पैसे डाले। आरोप है कि स्किट के दौरान पप्पू यादव ने प्रतीकात्मक रूप से दानपेटी से पैसे निकालकर अपनी जेब में रखे, जिसके माध्यम से राम मंदिर में कथित चोरी का मुद्दा उठाया गया।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन ने इस प्रदर्शन को “अशोभनीय” और “हिंदू आस्था का अपमान” बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवा वस्त्र धारण कर संतों की वेशभूषा का उपयोग कर प्रदर्शन करना संत समाज और करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संबंधित सांसदों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि VHP इस मामले में कानूनी कार्रवाई पर भी विचार कर रही है।
सुरेंद्र जैन ने रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार रावण ने साधु का वेश धारण कर माता सीता का हरण किया था, उसी प्रकार संतों का वेश धारण कर हिंदू आस्था का उपहास उड़ाने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें साहस है तो वे किसी अन्य धर्म के धार्मिक परिधान पहनकर ऐसा प्रदर्शन करके दिखाएं।
अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव जितेंद्रानंद सरस्वती ने भी प्रदर्शन की निंदा करते हुए कहा कि संसद जैसे पवित्र लोकतांत्रिक संस्थान का उपयोग सनातन धर्म और संत समाज का अपमान करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) और न्यायालय के स्तर पर हो रही है, ऐसे में इसे बहाना बनाकर सनातन परंपरा और संतों की तपस्या को बदनाम करना स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को भारतीय जनता पार्टी से राजनीतिक संघर्ष करना है तो वह राजनीतिक स्तर पर करे, लेकिन भगवान राम, सनातन धर्म और संत समाज का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित नेताओं से देश के हिंदुओं से बिना शर्त माफी मांगने की भी मांग की।
अयोध्या के कई प्रमुख संतों और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े पदाधिकारियों ने भी इस प्रदर्शन पर नाराजगी जताई। आचार्य विक्रमादित्य ने कहा कि कथित चोरी के मामले में कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन पूरे संत समाज को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास निंदनीय है।
सरयू आरती समिति के अध्यक्ष महामंडलेश्वर शशिकांत दास ने कहा कि संत की वेशभूषा धारण कर संसद परिसर में इस प्रकार का प्रदर्शन सनातन संस्कृति का अपमान है। वहीं महामंडलेश्वर नारायण गिरी महाराज ने कहा कि ऐसे मुद्दे उठाने वालों का सनातन धर्म से कोई सरोकार नहीं है।
भाजपा सांसद साक्षी महाराज ने भी इस घटना की आलोचना करते हुए इसे विपक्ष की सुनियोजित साजिश बताया और लोकसभा अध्यक्ष से दोषी सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े महंत दिनेंद्र दास, हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास, रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम, स्वामी दीपांकर, महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज, संत सत्येंद्र दास वेदांती तथा चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज सहित अयोध्या के कई संतों और धार्मिक संगठनों ने भी विपक्ष के इस प्रदर्शन की कड़ी निंदा की है।



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