यूएन में बोला भारत- मध्य पूर्व में स्थिरता जरूरी, 1 करोड़ प्रवासियों की सुरक्षा अहम
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 16 Oct, 2026 07:38 PMन्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में मध्य पूर्व की संवेदनशील स्थिति पर आयोजित खुली बहस के दौरान भारत ने अपना कड़ा और स्पष्ट राष्ट्रीय बयान प्रस्तुत किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने क्षेत्र में जारी तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने में भारत के बेहद गहरे और सीधे हित जुड़े हुए हैं।
न्यूयॉर्क स्थित यूएन में भारत के स्थायी मिशन ने एक बयान में बताया कि हरीश ने जोर दिया कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों में वर्तमान में लगभग 1 करोड़ भारतीय नागरिक निवास करते हैं। ऐसे में मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार की अशांति या युद्ध की स्थिति सीधे तौर पर प्रवासियों के जीवन और आजीविका को प्रभावित करती है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच से सभी संबंधित पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने, शत्रुता व तनाव को तुरंत कम करने और लंबे समय से चले आ रहे विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का पुरजोर आह्वान किया।
सुरक्षा परिषद की इस बैठक से इतर, संयुक्त राष्ट्र महासभा की दूसरी समिति (आर्थिक और वित्तीय) की बैठक में भारत ने विकासशील देशों की आवाज़ को मजबूती दी। 'विकास के लिए परिचालन गतिविधियों और दक्षिण-दक्षिण सहयोग' पर आयोजित आम चर्चा में भारतीय मिशन की काउंसलर सौम्या नायर ने भारत का आधिकारिक बयान दिया। उन्होंने विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के बीच आपसी सहयोग, तकनीकी साझाकरण और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयासों की प्रासंगिकता पर बल दिया। भारत ने कड़ा संदेश दिया कि वैश्विक समृद्धि के लिए विकासशील देशों को आर्थिक और सामाजिक मोर्चे पर एक-दूसरे का हाथ थामना होगा।
भारत द्वारा एक ही समय पर सुरक्षा परिषद में मध्य पूर्व के कूटनीतिक संकट पर राष्ट्रीय बयान देना और महासभा में विकासशील देशों के 'दक्षिण-दक्षिण सहयोग' की वकालत करना उसकी संतुलित विदेश नीति को दर्शाता करता है। एक तरफ जहां भारत ने 1 करोड़ प्रवासियों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के लिए शांति व कूटनीति का आह्वान किया। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर ग्लोबल साउथ की एकजुटता को मजबूत करने का संदेश देकर यह साबित किया कि भारत वैश्विक सुरक्षा के साथ-साथ सतत सामाजिक-आर्थिक विकास के प्रति भी समान रूप से गंभीर है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)



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