यूएन में पाकिस्तान समर्थित प्रस्ताव के खिलाफ भारत ने किया मतदान
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 4 Nov, 2026 03:50 PMन्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की 'प्रथम समिति' (निरस्त्रीकरण एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समिति) में भारत ने पाकिस्तान और बेलारूस द्वारा समर्थित पारंपरिक हथियारों के क्षेत्रीय नियंत्रण से जुड़े एक मसौदा प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया है। केवल भारत और इजरायल ऐसे दो देश रहे, जिन्होंने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ मतदान किया। भारत ने तर्क दिया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं को क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं किया जा सकता।
भारत के विरोध की वजह बताते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनमोल शेर बेदी ने कहा कि पारंपरिक हथियारों पर नियंत्रण एक वैश्विक मुद्दा है। उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या इस मुद्दे को मुख्य रूप से क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय ढांचों के जरिए ही संबोधित किया जाना चाहिए। बेदी ने कहा कि पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण एक वैश्विक विषय है और इसे केवल क्षेत्रीय या उप-क्षेत्रीय नजरिए से नहीं देखा जा सकता। भारत ने प्रस्ताव के उस हिस्से पर विशेष रूप से 'आश्चर्य और जिज्ञासा' प्रकट की, जिसमें संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग (यूएनडीसी) से क्षेत्रीय समझौतों के लिए नए मार्गदर्शक सिद्धांत तैयार करने को कहा गया था।
यूएन मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन ने ‘एक्स’ पर लिखा संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण आयोग पहले ही 1993, 1999 और 2017 में इस विषय पर आम सहमति से परिणाम अपना चुका है, इसलिए इस तरह की चर्चाओं के एक और दौर की आवश्यकता पर सवाल उठता है। भारत सहित विभिन्न देशों की सुरक्षा चिंताएं, संकीर्ण रूप से परिभाषित क्षेत्रों और उप-क्षेत्रों की सीमाओं से कहीं आगे तक जाती हैं, साथ ही, किसी क्षेत्र के भीतर रक्षा संतुलन बनाए रखना अव्यावहारिक है।
भारत ने प्रस्ताव में विशिष्ट क्षेत्रों के भीतर सैन्य व रक्षा क्षमताओं का 'संतुलन' बनाए रखने की वकालत करने वाले प्रावधानों का भी कड़ा विरोध किया। बेदी ने कहा कि यह सोच पूरी तरह अवास्तविक है, क्योंकि किसी भी देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सरोकार भौगोलिक सीमाओं के मोहताज नहीं होते और न ही वे क्षेत्रीय सरहदों पर आकर रुकते हैं। भारत ने दक्षिण एशिया के संदर्भ में पारंपरिक हथियारों के नियंत्रण से जुड़े एक विशिष्ट पैराग्राफ पर भी अलग से नकारात्मक मतदान किया।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)


No Previous Comments found.