राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अपील, ‘पेड़ लगाएं और जंगल बचाएं’

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Lucknow, 23 Oct, 2026 11:38 PM
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अपील, ‘पेड़ लगाएं और जंगल बचाएं’

नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने छत्तीसगढ़ में विकास की संभावनाओं, जनजातीय समुदाय की भूमिका और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने राज्य में विकास के नए अवसरों के लिए केंद्र और राज्य सरकार को बधाई दी। साथ ही, उन्होंने कहा कि आतंकवाद की पीड़ा को पीछे छोड़कर प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। राष्ट्रपति ने जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और उन्हें बाजार से जोड़ने के प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि समानता और समावेशी विकास के जरिए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में समाज के बच्चे और युवा महत्वपूर्ण योगदान देंगे। राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति आस्था और जीवनशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास की यात्रा में उनसे सीख लेने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जहां लोग पत्थर और मिट्टी की मूर्तियों की पूजा करते हैं, वहीं आदिवासी समाज जीवित पेड़-पौधों की पूजा करता है। पेड़-पौधे मनुष्य को जल, वायु, भोजन और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में जब आधुनिक सभ्यता विकसित नहीं हुई थी, तब भी भोजन और औषधियों के लिए लोग प्रकृति पर ही निर्भर थे। द्रौपदी मुर्मू ने पेड़-पौधों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मनुष्य अपनी जरूरतों के लिए जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करता है, लेकिन उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी उसे निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़ और पर्वत सुरक्षित रखना समाज का कर्तव्य है। एक पेड़ को विकसित होने में सैकड़ों वर्ष लग सकते हैं, इसलिए केवल पेड़ों की पूजा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नए पौधे लगाना और उन्हें संरक्षित करना भी जरूरी है। राष्ट्रपति ने कहा कि पेड़-पौधों के कारण वर्षा, स्वच्छ हवा, ऑक्सीजन, फल और भोजन जैसी आवश्यक चीजें मिलती हैं। उन्होंने देश के सभी जनजातीय समुदायों, समाज के लोगों और भाई-बहनों से खेती की जमीन, बंजर भूमि तथा अन्य खाली स्थानों पर पौधे लगाने का आग्रह किया। उन्होंने जंगलों में प्राकृतिक रूप से नए पौधे उगाने की परंपरा का भी उल्लेख किया, जिसमें बीजों को मिट्टी में डालकर जंगलों की हरियाली बनाए रखने में मदद मिलती है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि प्रकृति के प्रति सम्मान केवल परंपरा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारना जरूरी है। पेड़-पौधों की पूजा के साथ उनका रोपण और संरक्षण भी किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण और हरी-भरी धरती मिल सके। उनका आह्वान है कि सामूहिक प्रयासों से जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखा जाए। 

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