राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का किया उद्घाटन, कहा— मूल्यपरक शिक्षा से ही बनेगा विकसित भारत
2047 के विकसित भारत के लक्ष्य में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका अहम, युवाओं को ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों से भी जोड़ने का आह्वान
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 4 Aug, 2026 11:39 PMकटक (ओडिशा)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को ओडिशा के कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है और विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को ऐसी मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करें, जिससे वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभा सकें।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्मिकता और सेवा की समृद्ध परंपरा की धरती रही है। महाप्रभु श्रीजगन्नाथ की पावन भूमि ने सदियों से समावेश, करुणा और मानव कल्याण का संदेश दिया है। उन्होंने कटक की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र उत्कल गौरव मधुसूदन दास, कर्मवीर गौरीशंकर राय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और बीजू पटनायक जैसी महान विभूतियों की जन्मभूमि तथा पंडित गोपबंधु दास और डॉ. हरेकृष्ण महताब की कर्मभूमि रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे गौरवशाली क्षेत्र में स्थापित यह विश्वविद्यालय भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ते हुए समाज और राष्ट्र की सेवा का सशक्त माध्यम बनेगा।
उन्होंने कहा कि भारत विश्व के सबसे युवा देशों में शामिल है और यही युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। विश्वविद्यालयों को ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना होगा, जहां छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा का पूर्ण विकास कर सकें और अपने सपनों को साकार करने के साथ-साथ सत्यनिष्ठा, अनुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित जैसे मूल्यों को भी आत्मसात करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग मानवता की सेवा, समाज के कल्याण और राष्ट्र की उन्नति के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब देश के उच्च शिक्षण संस्थान नवाचार, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे आधुनिक ज्ञान और तकनीक को अपनाने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाएं। राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय में शोध, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह विश्वविद्यालय भविष्य में कुशल मानव संसाधन, शोधकर्ता और उद्यमी तैयार करेगा, जो ‘विकसित ओडिशा’ और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।



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