सुधांशु त्रिवेदी का आरोप: राहुल गांधी और कांग्रेस संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 12 Oct, 2026 10:52 PMनई दिल्ली, 12 अक्टूबर 2026 भारतीय जनता पार्टी के नेता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में अराजकता फैलाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय परिसर में हुए घटनाक्रम को अशोभनीय बताते हुए कहा कि इस तरह भीड़ के साथ न्यायालय को प्रभावित करने और आतंकित करने की कोशिश भारतीय इतिहास में अभूतपूर्व है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को पार कर दूसरे प्रवेश द्वार से अंदर जाने के कथित प्रयास पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि ऐसा व्यवहार देश में अव्यवस्था पैदा करने की मंशा को दर्शाता है। सुधांशु त्रिवेदी ने केरल कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया मंच एक्स पर की गई पोस्ट का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पोस्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को ‘डियर सूर्यकांत’ कहकर संबोधित किया गया और उनसे इस्तीफा देने की मांग की गई। पोस्ट में कथित तौर पर यह भी कहा गया कि यदि कानून-व्यवस्था संभालना उनके बस में नहीं है, तो वे पद छोड़ दें और उनकी जगह किसी अन्य को नियुक्त कर लिया जाएगा। त्रिवेदी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना न्यायालय का विषय नहीं है। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर रही थी और अब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केरल कांग्रेस की पोस्ट से पार्टी की मंशा स्पष्ट हो गई है। इस संदर्भ में उन्होंने केरल में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के गठबंधन का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के राज्य से जुड़े राजनीतिक संबंधों की ओर भी ध्यान दिलाया। अपने बयान के अंतिम हिस्से में सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने और देश में अराजकता फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस के लिए ‘मुस्लिम लीग की माओवादी कांग्रेस’ और ‘दिमागी नक्सल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। त्रिवेदी ने देशवासियों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि उनके अनुसार, कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भारत की संवैधानिक संस्थाओं तथा संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं।



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