राम विरोधी होकर शिव को भजना रावण जैसा’, सुधांशु त्रिवेदी का कांग्रेस पर हमला
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 30 Sep, 2026 10:01 PMनई दिल्ली, 30 सितंबर 2026 भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने भगवान राम और भगवान शिव को लेकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणी पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए राम और शिव को अलग-अलग वर्गों से जोड़ने की बात पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “अब मैं इस विषय का शास्त्रीय जवाब देता हूँ। क्योंकि देखिए कांग्रेस के एक बार राहुल गाँधी, उन्होंने पढ़े-लिखे तो कुछ होंगे नहीं तो मतलब बिल्कुल पक्का ही पता है। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर जो हैं वो गरीबों के देवता हैं और भगवान राम अमीरों के देवता हैं। ऐसा विचित्र उदाहरण देने वाला विलक्षण बुद्धि बालक ही हो सकता है।” इसके बाद उन्होंने कुबेर और रावण का उदाहरण देते हुए कहा, “अब मैं बताना चाहता हूँ - कुबेर हमारे यहाँ धन के अधिपति देवता हैं और शिव महापुराण में भगवान शिव स्वयं पार्वती जी से कहते हैं कि कुबेर मेरे पुत्र के समान है।” त्रिवेदी ने भगवान राम के भक्तों और रामेश्वरम का उल्लेख करते हुए कहा, “और भगवान राम के भक्त कौन हैं? हनुमान जी, वनवासी, गिरिवासी, जामवंत जी, माता शबरी, निषाद राज गुह।” उन्होंने कहा, “और भगवान राम क्या कह रहे हैं? जब लंका पर विजय प्राप्त करनी है तो रामेश्वरम का शिवलिंग स्थापित कर रहे हैं और वो कह रहे हैं - रामस्य ईश्वरः यः सः रामेश्वरम। जो भगवान राम का ईश्वर है वह रामेश्वरम है।” उन्होंने आगे कहा, “अर्थात यह बहुत स्पष्ट हो जाता है कि जो लोग इसमें विभाजन की दृष्टि से देखते हैं उन्हें हिंदू का क ख ग भी नहीं पता है या फिर वो उस विभाजनकारी मानसिकता के टूल बने हुए हैं।” साथ ही उन्होंने कहा, “और हाँ, ये जरूर है - जो राम विरोधी होकर भगवान शिव को भजता है, वो रावण जैसा ही होता है।” उन्होंने रामचरितमानस का हवाला देते हुए कहा, “और भगवान राम ने स्वयं बोला है - शंकर प्रिय मम द्रोही, शिव द्रोही मम दास। ते नर करहिं कलप भरि घोर नरक महुँ वास। अर्थात यदि कोई शंकर जी को प्रिय कह के मेरे से द्रोह करता है और मेरे को प्रिय कह के भगवान शंकर से द्रोह करता है तो वो एक कल्प तक... वो नरक में वास करता है।” इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के क्षेत्र का नाम ‘शिव शक्ति’ रखे जाने और CERN प्रयोगशाला में नटराज की प्रतिमा का जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया, “मैं पूछना चाहता हूँ कितने कांग्रेस के नेताओं ने उस समय इसको challenge किया? जब प्रधानमंत्री जी ने point का नाम शिवशक्ति रखा, कितने नेताओं ने उसके पक्ष में जा के बोला?” अंत में सुधांशु त्रिवेदी ने काशी विश्वनाथ से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए कहा, “और अंत में पूछना चाहता हूँ यदि आप बहुत बड़े शिव भक्त हैं तो श्री काशी विश्वनाथ पर वो औरंगजेब के नाम की मस्जिद रहनी चाहिए या नहीं? निर्णय न्यायालय करेगा। मगर न्यायालय में सब अपना-अपना पक्ष रखते हैं पर आपके हृदय की आकांक्षा क्या है? हमारे हृदय की आकांक्षा है कि किसी विदेशी आक्रांता का कोई भी प्रभाव भगवान शिव के किसी ज्योतिर्लिंग पे नहीं होना चाहिए।”



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