‘पेपर लीक पर अब माफिया नहीं बचेगा’, राज्यसभा में राघव चड्ढा ने एंटी-पेपर लीक कानून का किया समर्थन

NEET से लेकर भर्ती परीक्षाओं तक का किया जिक्र, कहा- छात्रों की मेहनत और मेरिट की रक्षा करेगा नया कानून

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Lucknow, 31 Jul, 2026 10:40 PM
‘पेपर लीक पर अब माफिया नहीं बचेगा’, राज्यसभा में राघव चड्ढा ने एंटी-पेपर लीक कानून का किया समर्थन

नई दिल्ली, 31 जुलाई। राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान सांसद राघव चड्ढा ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे देश का पहला समर्पित एंटी-पेपर लीक फ्रेमवर्क बताया। उन्होंने कहा कि वर्षों से पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों छात्रों की मेहनत, सपनों और भविष्य को प्रभावित किया है, लेकिन अब देश एक ऐसे मजबूत कानूनी ढांचे की ओर बढ़ रहा है जो संगठित पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाएगा।

राघव चड्ढा ने कहा कि यह कानून केवल पेपर लीक होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए व्यापक संस्थागत व्यवस्था तैयार करता है। उनके अनुसार यह विधेयक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

छात्रों की आवाज सुनी, सरकार ने उठाए ठोस कदम

अपने संबोधन में राघव चड्ढा ने NEET अभ्यर्थियों के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्रों का आक्रोश और उनकी शिकायतें पूरी तरह जायज थीं। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज सुनने के बाद केंद्र सरकार ने त्वरित कदम उठाए और प्रधानमंत्री ने एक अभिभावक की तरह निर्णय लेते हुए परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों का रास्ता चुना।

उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र और उनके परिवार वर्षों तक कठिन परिश्रम और आर्थिक त्याग करते हैं। ऐसे में जब पेपर लीक होता है तो केवल प्रश्नपत्र ही नहीं, बल्कि छात्रों का आत्मविश्वास, मेहनत और भविष्य भी प्रभावित होता है।

NEET के बाद उठाए गए कदमों का किया उल्लेख

राघव चड्ढा ने कहा कि NEET प्रकरण के बाद सरकार ने पुनर्परीक्षा आयोजित कराई, जांच CBI को सौंपी, विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की और समयबद्ध चार्जशीट दाखिल की। उन्होंने NTA में प्रशासनिक सुधार, परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा भविष्य में NEET को पूर्णतः कंप्यूटर आधारित परीक्षा बनाने के निर्णय का भी उल्लेख किया।

उन्होंने परीक्षा सुधारों के लिए विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय टास्क फोर्स के गठन का भी स्वागत किया।

“राजनीति नहीं, संस्थागत सुधार जरूरी”

राघव चड्ढा ने कहा कि पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या का समाधान राजनीतिक बयानबाजी से नहीं बल्कि मजबूत संस्थागत सुधारों से संभव है। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया देने के बजाय व्यापक कानूनी व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया है।

उन्होंने बेंजामिन फ्रैंकलिन के कथन “Well done is better than well said” का उल्लेख करते हुए कहा कि अब केवल चर्चा नहीं, बल्कि ठोस सुधार लागू किए जा रहे हैं।

कानून में सख्त दंड का प्रावधान

सांसद ने कहा कि नए कानून के तहत पेपर लीक को संगठित अपराध माना जाएगा। इसमें कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग प्रेस, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क, सॉल्वर गैंग, अंदरूनी लोगों और भ्रष्ट अधिकारियों की भूमिका को भी दायरे में लाया गया है।

उन्होंने बताया कि विधेयक में 10 वर्ष तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना, अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाने, विशेष जांच दल, फास्ट ट्रैक कोर्ट और विशेष लोक अभियोजकों की व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं।

छात्र आंदोलनों के राजनीतिकरण से बचने की अपील

राघव चड्ढा ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध और जवाबदेही मांगने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन छात्र आंदोलनों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं बल्कि “मेरिट बनाम माफिया” की लड़ाई है। उनके अनुसार छात्रों को सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ के लिए उनका इस्तेमाल।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिया जोर

अपने भाषण में राघव चड्ढा ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सामाजिक दबाव के बीच अभिभावकों और शिक्षकों को यह समझना होगा कि परीक्षा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन छात्र उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा, “एक परीक्षा केवल रैंक तय कर सकती है, किसी छात्र की कीमत, सम्मान या भविष्य नहीं।”

विपक्ष और राज्यों पर भी साधा निशाना

राघव चड्ढा ने कहा कि देश में विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं। उन्होंने पूर्ववर्ती UPA सरकार के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुए कथित पेपर लीक मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय कोई व्यापक कानूनी ढांचा तैयार नहीं किया गया।

उन्होंने पंजाब में आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं और कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान पेपर लीक मामलों का भी जिक्र करते हुए कहा कि जवाबदेही राजनीतिक दलों के आधार पर नहीं बल्कि समान रूप से तय होनी चाहिए।

“मुझे सुर्खियां नहीं, समाधान चाहिए था”

अपने संबोधन के अंत में राघव चड्ढा ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए सवाल उठाना उनका दायित्व था, लेकिन जब सरकार समाधान लेकर आई है तो उसका समर्थन करना भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य राजनीतिक सुर्खियां बटोरना नहीं, बल्कि छात्रों के हित में स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास जताया कि नए कानून से देश की परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी तथा पेपर लीक माफिया पर प्रभावी अंकुश लगेगा।


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