लखनऊ में साइबर ठगी का बड़ा खेल, तीन लोगों से 23.55 लाख ऐंठे
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 19 Sep, 2026 06:06 PMनई दिल्ली, 19 सितंबर 2026 लखनऊ में साइबर अपराधियों ने अलग-अलग तरीकों से तीन लोगों को निशाना बनाकर कुल 23 लाख 55 हजार रुपये की ठगी कर ली। कहीं सीबीआई कार्रवाई और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया तो कहीं पति की गिरफ्तारी का भय पैदा किया गया। एक मामले में मोबाइल पर फर्जी APK फाइल भेजकर खाते से रकम निकाल ली गई। तीनों मामलों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सेक्टर-ए महानगर निवासी 65 वर्षीय तरुश्री सामाजिक कार्यकर्ता रही हैं, जबकि उनके पति मल्टीनेशनल कंपनी से सेवानिवृत्त हैं। तरुश्री के मुताबिक, 1 सितंबर की शाम करीब 5 बजे एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी सुशील कुमार गौतम बताया। बाद में वॉट्सऐप चैट, कॉल और वीडियो कॉल के जरिए उन्हें बताया गया कि उनके नाम गिरफ्तारी वारंट जारी है और उन्हें डिजिटल अरेस्ट किया गया है। करीब नौ दिनों तक लगातार डराने के बाद 10 सितंबर को उनसे 9 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। इसके बाद जालसाजों ने 15 लाख रुपये और मांगे। रकम भेजने से पहले उन्होंने अमेरिका में रह रहे अपने बेटे से संपर्क किया, जिसके बाद साइबर पोर्टल पर शिकायत की गई। इंस्पेक्टर आलोक राव के अनुसार, ठगी की रकम मणिपुर के एक खाते में पहुंची है और जल्द ही पुलिस टीम वहां भेजी जाएगी। फैजुल्लागंज के निराला नगर निवासी शिखा कश्यप को 25 जुलाई को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉलर ने दावा किया कि उनके पति सोना और 10 से 20 लाख रुपये लेकर आ रहे थे और अमौसी एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने उन्हें पकड़ लिया है। इसके बाद बेटी और रिश्तेदारों के नाम से भी फोन कर पैसे मांगे गए। फिर दूसरे नंबर से कॉल कर कहा गया कि रकम नहीं देने पर पति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया जाएगा। घबराई शिखा ने घर में रखी नकदी और जेवर गिरवी रखकर दो अलग-अलग खातों में 9.50 लाख रुपये जमा कर दिए। सेक्टर-19 इंदिरानगर निवासी अशोक चटर्जी के साथ 29 अगस्त को साइबर ठगी हुई। उनके मोबाइल पर वॉट्सऐप के जरिए “Green Gas Meter Update.apk” नाम की फाइल भेजी गई। इसके बाद दूसरे नंबर से तीन और APK फाइलें आईं। कुछ देर बाद उन्हें फोन आने लगे और करीब एक घंटे 16 मिनट के भीतर खाते से रकम निकलनी शुरू हो गई। अशोक के मुताबिक, उनके खाते से करीब 5 लाख 5 हजार रुपये निकाल लिए गए। इन तीनों मामलों में जालसाजों ने अलग-अलग तरीकों से पीड़ितों को विश्वास में लेकर या डर पैदा करके रकम ट्रांसफर कराई। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और ठगी में इस्तेमाल खातों व मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई जा रही है।



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