UTU पेपर लीक मामला: दो बीटेक परीक्षाएं रद्द, आरोपी सहायक प्रोफेसर पर 7 साल का प्रतिबंध
व्हाट्सएप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए प्रश्न साझा करने का आरोप, 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्र होंगे प्रभावित
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 23 Jul, 2026 06:53 PMदेहरादून। उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय (UTU) की बीटेक सम-सेमेस्टर परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए दो विषयों की परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। मामले की जांच में प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले छात्रों तक पहुंचने की पुष्टि होने पर आरोपी सहायक प्रोफेसर को सात वर्षों के लिए परीक्षा संबंधी सभी कार्यों से प्रतिबंधित कर दिया गया है। साथ ही पुलिस ने भी आरोपी को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, उसे एक ई-मेल के माध्यम से सूचना मिली थी कि बीटेक तृतीय वर्ष (सम-सेमेस्टर) की परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले लीक हो गया है। शिकायत के बाद गठित जांच समिति ने पाया कि ‘मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स’ विषय के प्रश्न परीक्षा से पहले व्हाट्सएप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाए गए थे। इसके अलावा ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थ्योरी’ विषय के प्रश्नपत्र की गोपनीयता पर भी गंभीर संदेह सामने आने के बाद एहतियातन इस परीक्षा को भी रद्द कर दिया गया।
जांच में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा के सहायक प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता की भूमिका सामने आने पर विश्वविद्यालय ने उन्हें अगले सात वर्षों तक किसी भी परीक्षा संबंधी कार्य से प्रतिबंधित कर दिया है। विश्वविद्यालय ने संबंधित संस्थान के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
उधर, परीक्षा नियंत्रक की शिकायत पर देहरादून के प्रेमनगर थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। एसएसपी देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने जांच करते हुए आरोपी सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपी से बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
विश्वविद्यालय की कुलपति तृप्ति ठाकुर ने बताया कि दोनों विषयों की पुनर्परीक्षा अगस्त के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी। नई डेटशीट जल्द ही विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी।
इन परीक्षाओं में प्रदेश के 12 इंजीनियरिंग संस्थानों के छात्र शामिल होंगे। इनमें बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज, भीमताल; तुलाज इंस्टीट्यूट, देहरादून; बीटीकेआईटी, द्वाराहाट; रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी; शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग; जयरामभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी; माया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी; बाबा फरीद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी; टीएचडीसी इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, टिहरी; नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान, पिथौरागढ़; वूमेन्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, देहरादून तथा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, गोपेश्वर शामिल हैं।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र लीक का लाभ लगभग 12 छात्रों तक ही सीमित था। इसके बावजूद परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय ने पूरी परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का निर्णय लिया है।
इस घटना के बाद छात्रों में भी नाराजगी देखने को मिली। विश्वविद्यालय परिसर के बाहर छात्रों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। छात्रों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं और इससे परीक्षा व्यवस्था पर विश्वास कमजोर होता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस दोनों स्तरों पर जांच जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में किस प्रकार के सुरक्षा और निगरानी उपाय लागू किए जाते हैं।
— आदित्य अमिताभ त्रिवेदी, युगवार्ता
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