45 दिन में सुशासन का रिकॉर्ड: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान से 5 लाख से अधिक लोग लाभान्वित

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Lucknow, 20 Feb, 2026 10:13 PM
45 दिन में सुशासन का रिकॉर्ड: ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान से 5 लाख से अधिक लोग लाभान्वित

देहरादून। उत्तराखंड सरकार का महत्वाकांक्षी अभियान ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ 45 दिनों की अवधि के बाद शुक्रवार को अभूतपूर्व उपलब्धियों के साथ सम्पन्न हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चले इस विशेष अभियान के तहत प्रदेशभर में कुल 681 शिविरों का आयोजन किया गया, जिसमें 5,33,452 नागरिकों ने प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी की और सरकारी सेवाओं का लाभ उठाया।


अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने से मुक्त करना था। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए प्रशासन खुद लोगों तक पहुंचा और मौके पर ही जन शिकायतों का निस्तारण किया।



681 शिविर, 33 हजार से अधिक शिकायतों का समाधान


अभियान के दौरान प्रदेशभर से 51,053 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 33,755 शिकायतों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। यह आंकड़े प्रदेश में सुशासन और प्रशासनिक संवेदनशीलता का स्पष्ट प्रमाण हैं।


इसके साथ ही शिविरों के माध्यम से विभिन्न प्रकार के प्रमाणपत्रों के लिए 74,184 आवेदन प्राप्त हुए, जिन पर त्वरित कार्रवाई की जा रही है। वहीं, करीब 3 लाख नागरिकों ने अलग-अलग सरकारी सेवाओं का सीधा लाभ लिया।



एक ही दिन में 11 कैंप, 8,209 नागरिकों की भागीदारी


अभियान के अंतिम दिन यानी शुक्रवार को भी इसका प्रभाव देखने को मिला। अकेले एक दिन में 11 कैंप आयोजित किए गए, जिनमें 8,209 लोगों ने प्रतिभाग कर अपनी समस्याएं दर्ज कराईं और कई मामलों में तत्काल समाधान प्राप्त किया।



सुशासन की दिशा में मजबूत कदम


मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि जनता को बिना किसी भागदौड़ के सरकारी सेवाएं मिलना ही सुशासन की पहली सीढ़ी है। इसी सोच के तहत दिसंबर माह से शुरू किया गया यह 45 दिवसीय अभियान पूरी तरह सफल रहा।


हालांकि यह विशेष अभियान अब औपचारिक रूप से सम्पन्न हो गया है, लेकिन सरकार और प्रशासन जनता के संपर्क में निरंतर बना रहेगा। अधिकारियों को आगे भी सक्रिय रहकर जन शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए हैं।


यह अभियान इस बात का सशक्त उदाहरण है कि उत्तराखंड सरकार योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी और ज़मीनी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।


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