उत्तराखंड : 74 करोड़ की जिला योजना को मंजूरी, चमोली में विकास और रोजगार पर बड़ा फोकस

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Lucknow, 17 May, 2026 06:35 PM
उत्तराखंड : 74 करोड़ की जिला योजना को मंजूरी, चमोली में विकास और रोजगार पर बड़ा फोकस

चमोली, 17 मई: जनपद चमोली के समग्र विकास, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को गति देने के उद्देश्य से प्रभारी मंत्री भरत सिंह चौधरी की अध्यक्षता में रविवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला योजना समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 74 करोड़ 23 लाख 70 हजार रुपये की वार्षिक जिला योजना को अनुमोदन दिया गया। योजना में सड़क, पेयजल, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, कृषि, पशुपालन और स्वरोजगार आधारित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

बैठक में प्रभारी मंत्री ने कहा कि बीते वर्ष जनपद में अनेक विकासपरक और जनहितकारी कार्य सफलतापूर्वक पूरे हुए हैं तथा नई जिला योजना जनपद के संतुलित और सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को जिला योजना में शामिल किए जाने पर संतोष जताते हुए योजनाओं को प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारने पर बल दिया।

बैठक से पूर्व जिलाधिकारी गौरव कुमार ने प्रभारी मंत्री का पुष्पगुच्छ और शॉल भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद विभागवार योजनाओं की समीक्षा करते हुए लोक निर्माण, ग्रामीण निर्माण, पेयजल, कृषि, उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सिंचाई, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज, उद्योग, खेल एवं युवा कल्याण सहित विभिन्न विभागों की प्रस्तावित योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

क्लस्टर आधारित विकास और रोजगार पर जोर

प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं को क्लस्टर आधारित मॉडल पर लागू किया जाए और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर समन्वय से अधिकतम लाभ आम लोगों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने अधूरे एवं गतिमान कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण करने के निर्देश भी दिए।

कृषि और उद्यान क्षेत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर देते हुए उन्होंने किसानों को सब्सिडी पर गुणवत्तापूर्ण कृषि उपकरण उपलब्ध कराने और फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए चैन लिंक फेंसिंग को प्राथमिकता देने को कहा। वहीं जनपद में कीवी उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुए बड़े क्लस्टर विकसित करने, मार्केटिंग और पैकेजिंग व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश भी दिए ताकि किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।

पशुपालन को बताया “गेम चेंजर”

प्रभारी मंत्री ने पशुपालन को पहाड़ों की अर्थव्यवस्था के लिए “गेम चेंजर” बताते हुए जिला योजना के माध्यम से इस क्षेत्र में बड़े और प्रभावी कार्य किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पशुपालन और ऑर्गेनिक फार्मिंग स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। साथ ही अच्छी नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने मत्स्य पालन, डेयरी और सहकारिता को भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए इनमें अधिक निवेश और नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया।

किन विभागों को कितना मिला बजट?

जिला योजना के तहत लोक निर्माण विभाग को सड़क एवं पुल निर्माण के लिए 6.25 करोड़ रुपये, राजकीय सिंचाई को 5.80 करोड़ रुपये, लघु सिंचाई को 2.80 करोड़ रुपये, पेयजल संस्थान को 5.20 करोड़ रुपये और पेयजल निगम को 2.40 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

इसके अलावा पर्यटन विभाग को 5.10 करोड़ रुपये, प्रादेशिक विकास दल को 4.70 करोड़ रुपये, कृषि विभाग को 4.80 करोड़ रुपये, उद्यान विभाग को 5.05 करोड़ रुपये तथा पशुपालन विभाग को 3.65 करोड़ रुपये का परिव्यय अनुमोदित किया गया।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में प्रारंभिक शिक्षा हेतु 4.30 करोड़ रुपये, माध्यमिक शिक्षा हेतु 4.25 करोड़ रुपये, एलोपैथिक चिकित्सा के लिए 2.88 करोड़ रुपये, आयुर्वेद विभाग हेतु 70 लाख रुपये और होम्योपैथिक चिकित्सा के लिए 11 लाख रुपये स्वीकृत किए गए।

अर्थ एवं संख्या अधिकारी विनय जोशी ने बताया कि इस वर्ष की जिला योजना में 51.91 प्रतिशत धनराशि नए कार्यों, 31.22 प्रतिशत वचनबद्ध एवं मानदेय मद तथा 16.87 प्रतिशत स्वरोजगार योजनाओं के लिए निर्धारित की गई है।

बैठक में विधायक अनिल नौटियाल, विधायक भूपाल राम टम्टा, राज्य मंत्री हरक सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, भाजपा जिला अध्यक्ष गजपाल बर्त्वाल, नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत सहित जनप्रतिनिधि और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।


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