केदारनाथ में 5000 तक अश्ववंशीय पशुओं को अनुमति, बिना पंजीकरण संचालन पर रोक; पशु क्रूरता पर होगी एफआईआर

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Lucknow, 27 May, 2026 09:44 PM
केदारनाथ में 5000 तक अश्ववंशीय पशुओं को अनुमति, बिना पंजीकरण संचालन पर रोक; पशु क्रूरता पर होगी एफआईआर

-आदित्य अमिताभ त्रिवेदी 

देहरादून, 27 मई। उत्तराखंड सरकार ने चारधाम एवं आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के साथ ही अश्ववंशीय पशुओं (घोड़ा-खच्चर आदि) के कल्याण और संरक्षण के उद्देश्य से नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी और इसके तहत पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण, संचालन क्षमता, पशु कल्याण और निगरानी से जुड़े सख्त प्रावधान किए गए हैं।


शासन की ओर से अपर सचिव संतोष बडोनी द्वारा जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि Kedarnath Temple, Yamunotri Temple, Hemkund Sahib और Adi Kailash यात्रा मार्गों पर अश्ववंशीय पशुओं के संचालन के लिए नई एसओपी लागू की गई है। यह व्यवस्था National Green Tribunal (एनजीटी) और Uttarakhand High Court के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है।


नई एसओपी के तहत यात्रा मार्गों की वहन क्षमता निर्धारित कर दी गई है। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अधिकतम 5000 अश्ववंशीय पशुओं, हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर लगभग 1050 तथा यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर लगभग 595 पशुओं के संचालन की अनुमति होगी। सरकार का कहना है कि इससे यात्रा मार्गों पर भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और पशु कल्याण सुनिश्चित किया जा सकेगा।


सरकार ने सभी अश्ववंशीय पशुओं का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। पंजीकरण से पहले स्वास्थ्य परीक्षण, ग्लैंडर्स जांच, इयर टैगिंग और माइक्रोचिपिंग कराना जरूरी होगा। स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता 45 दिन होगी, जिसके बाद पुनः जांच अनिवार्य होगी। अपंजीकृत पशुओं के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा तथा वार्षिक पंजीकरण जिला प्रशासन और जिला पंचायत की निगरानी में किया जाएगा।


नई व्यवस्था में पशु कल्याण को प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक एक किलोमीटर पर स्वच्छ एवं गुनगुने पेयजल, चारा और इलेक्ट्रोलाइट की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। पशुओं को चोट से बचाने के लिए हल्की और वाटरप्रूफ काठी के उपयोग पर जोर दिया गया है। संवेदनशील स्थानों और जल ट्रफ के समीप सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे तथा निगरानी के लिए पशु चिकित्सकों और अधिकारियों की तैनाती होगी।


एसओपी में पशुओं पर अधिक भार लादने, घायल या बीमार पशुओं से काम लेने, बिना टोकन संचालन, पशुओं को पीटने, तेज गति से दौड़ाने तथा इयर टैग और माइक्रोचिप से छेड़छाड़ जैसी गतिविधियों को पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। दोषी पाए जाने पर Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960 और भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई करते हुए लाइसेंस निरस्त करने, ब्लैकलिस्ट करने और एफआईआर दर्ज करने का प्रावधान किया गया है।


नई गाइडलाइन के अनुसार यात्रा अवधि में प्रत्येक पशु के साथ संचालक (हॉकर) की मौजूदगी अनिवार्य होगी। लावारिस या बिना संचालक पाए गए पशुओं को तत्काल कब्जे में लेकर कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक पशु स्वामी अधिकतम दो अश्ववंशीय पशुओं का संचालन कर सकेगा और प्रतिदिन केवल एक टोकन जारी होगा।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद अश्ववंशीय पशुओं का संचालन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। टोकन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक जारी होंगे। खराब मौसम, बारिश, ओलावृष्टि या बर्फबारी की स्थिति में संचालन तत्काल रोक दिया जाएगा।


यात्रा मार्गों पर स्थायी और अस्थायी पशु चिकित्सालय, 24x7 इन्फर्मरी सुविधा, पैरावेट कर्मियों की तैनाती, मृत पशुओं के वैज्ञानिक निस्तारण और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके अलावा म्यूल टास्क फोर्स का गठन, अतिरिक्त चेक पोस्ट, रात्रि गश्त, डिजिटल रिकॉर्डिंग सिस्टम और पशु क्रूरता संबंधी शिकायतों के निस्तारण के लिए 24x7 हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।


राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों को नई एसओपी का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा है कि यात्रा मार्गों पर यात्रियों की सुरक्षा, पशु कल्याण और यात्रा प्रबंधन के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।


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