उत्तराखंड : 3 साल से अधिक प्रतिनियुक्ति पर तैनात कार्मिक लौटेंगे मूल तैनाती पर, एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 8 Apr, 2026 05:08 PMदेहरादून। विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़, पारदर्शी और परिणाममुखी बनाने के लिए लंबे समय से प्रतिनियुक्ति और अटैचमेंट पर कार्यरत शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कार्मिकों को उनके मूल तैनाती स्थल पर वापस भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन वर्ष से अधिक समय से प्रतिनियुक्ति पर तैनात कार्मिकों की समीक्षा कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर वापस किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने प्रदेशभर के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को निर्देशित किया है कि अपने-अपने जनपदों में प्रतिनियुक्ति एवं अटैचमेंट पर कार्यरत कार्मिकों की विस्तृत सूची एक सप्ताह के भीतर शिक्षा महानिदेशक को उपलब्ध कराएं। इस सूची में कार्मिक का नाम, पद, मूल तैनाती स्थल, वर्तमान कार्यस्थल, प्रतिनियुक्ति की अवधि और उसके कारण सहित सभी आवश्यक जानकारियां शामिल होंगी।
डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि शिक्षा विभाग में मानव संसाधनों के प्रभावी उपयोग और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की शिकायतें मिल रही हैं, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी विभिन्न कार्यालयों या अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति या अटैचमेंट पर कार्यरत हैं। ऐसे में वास्तविक स्थिति का आकलन कर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि तीन वर्ष से अधिक समय से प्रतिनियुक्ति अथवा अटैचमेंट पर कार्यरत कार्मिकों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। जिनकी तैनाती आवश्यक नहीं पाई जाएगी, उन्हें मूल तैनाती स्थल पर वापस भेजा जाएगा। हालांकि दिव्यांग कार्मिकों या विशेष परिस्थितियों में तैनात कर्मचारियों को नियमानुसार छूट दी जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों की वापसी से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था और मजबूत होगी तथा छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि तय समयसीमा के भीतर सटीक और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराएं। किसी भी स्तर पर लापरवाही या तथ्य छुपाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में व्यवस्थागत सुधार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह पहल भी शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, अनुशासित और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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