पेड़ों की कटाई पर NHAI ने तोड़ी चुप्पी, दावों को बताया भ्रामक
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 10 Jul, 2026 10:10 PMदेहरादून। भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में प्रसारित पर्यावरण एवं वन संरक्षण संबंधी दावों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। प्राधिकरण ने कहा है कि परियोजना में आधुनिक और सुरक्षित सड़क निर्माण के साथ पर्यावरण संरक्षण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए पेड़ों की कटाई किए जाने के दावे पूरी तरह भ्रामक और तथ्यहीन हैं।
एनएचएआई के पीआईयू देहरादून के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने बताया कि परियोजना की इंजीनियरिंग डिजाइन तैयार करते समय सड़क क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखने पर विशेष ध्यान दिया गया है। वन क्षेत्र में राइट ऑफ वे (ROW) को 60 मीटर से घटाकर केवल 23 मीटर रखा गया है, ताकि अतिरिक्त वन भूमि प्रभावित न हो।
उन्होंने बताया कि परियोजना में उत्तराखंड वन विभाग, WWF-India और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के तकनीकी सहयोग से हाथियों और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए वैज्ञानिक उपाय किए जा रहे हैं। इसके तहत एक प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास, चार समर्पित एलीफेंट अंडरपास (करीब 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना), छह बॉक्स कल्वर्ट तथा 13 पाइप कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय और ‘नो हॉर्न’ जोन जैसी व्यवस्थाएं भी परियोजना का हिस्सा हैं।
एनएचएआई के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा योजनाओं के लिए अब तक ₹6.04 करोड़ से अधिक की राशि जमा कराई जा चुकी है। प्रतिपूरक वनीकरण और उसके अगले 10 वर्षों के रखरखाव के लिए ₹1.97 करोड़ से अधिक की राशि जमा की गई है। साथ ही राज्य सरकार द्वारा 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि वन विभाग को हस्तांतरित की गई है, जहां प्रतिपूरक वनीकरण किया जाएगा।
प्राधिकरण ने बताया कि परियोजना से प्रभावित 4,369 पेड़ों में से 754 पेड़ों का वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर प्रत्यारोपण किया जाएगा, जबकि शेष पेड़ों का प्रबंधन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि जहां संभव हो, परिपक्व पेड़ों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर हरित आवरण को संरक्षित रखा जाए।
एनएचएआई ने सोशल मीडिया और कुछ समाचार रिपोर्टों में किए जा रहे उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि प्राधिकरण और वन विभाग हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। सौरभ सिंह ने कहा कि इस मामले में दायर अवमानना याचिका को उच्च न्यायालय पहले ही खारिज कर चुका है, जिससे स्पष्ट है कि परियोजना का कार्य सभी वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त करने के बाद तथा न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण पालन करते हुए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक सड़क अवसंरचना का विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। एनएचएआई भविष्य में भी सतत विकास, जैव विविधता संरक्षण और हरित आवरण को प्राथमिकता देते हुए कार्य करता रहेगा।



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