उत्तराखंड में हाई अलर्ट: 24×7 अलर्ट मोड पर रहें अधिकारी, चारधाम यात्रा पर भी सख्त निर्देश

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Lucknow, 9 Jul, 2026 08:01 PM
उत्तराखंड में हाई अलर्ट: 24×7 अलर्ट मोड पर रहें अधिकारी, चारधाम यात्रा पर भी सख्त निर्देश

देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश और मौसम विभाग की भारी वर्षा की चेतावनी के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशभर में वर्षा से उत्पन्न स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी संबंधित विभागों को 24×7 सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में मौसम पूर्वानुमान, सड़क संपर्क, नदियों के जलस्तर, चारधाम यात्रा और राहत-बचाव कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। सचिव ने कहा कि जन-जीवन की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ पूरी तत्परता से कार्य करना होगा।

उन्होंने बताया कि 10 जुलाई के लिए मौसम विभाग ने नैनीताल, ऊधमसिंहनगर और चम्पावत जिलों में रेड अलर्ट, जबकि पौड़ी गढ़वाल, देहरादून और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए जिलाधिकारियों, पुलिस, एसडीआरएफ, लोक निर्माण विभाग, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य तथा अन्य संबंधित विभागों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

चारधाम यात्रा को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। निर्देश दिए गए हैं कि जिन क्षेत्रों में मौसम अत्यधिक खराब हो या यात्रा करना जोखिमपूर्ण हो, वहां श्रद्धालुओं को सुरक्षित होल्डिंग प्वाइंट्स पर रोका जाए। इन स्थानों पर भोजन, पेयजल, दवाइयों, बच्चों के लिए दूध, शौचालय, आवास और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मौसम सामान्य होने और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने के बाद ही यात्रियों को आगे भेजा जाए।

सचिव आपदा प्रबंधन ने अधिकारियों को नदियों, बरसाती नालों, गाड़-गदेरों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए। साथ ही निर्माण स्थलों पर कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए जरूरत पड़ने पर निर्माण कार्य अस्थायी रूप से रोकने के भी निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में वर्षा से प्रभावित सड़कों, पेयजल और विद्युत आपूर्ति की भी समीक्षा की गई। सचिव ने निर्देश दिए कि भूस्खलन या बारिश से बंद हुई सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द खोला जाए। विशेष रूप से ग्रामीण सड़कों को युद्धस्तर पर बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं, राहत सामग्री और अन्य आवश्यक सुविधाओं की आपूर्ति बाधित न हो। इसके लिए संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी, पोकलेन मशीनों और आवश्यक मानवबल की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने को कहा गया है।

सचिव विनोद कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों से अपील की कि मौसम विभाग की चेतावनियों का गंभीरता से पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें और विशेष रूप से पर्वतीय एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में जाने से परहेज करें। उन्होंने लोगों से नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन या आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करने की अपील की। साथ ही केवल शासन और प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की सलाह दी।


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