देहरादून: आईजीएनएफए में 2024 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारियों का दीक्षांत समारोह, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बांटे प्रमाणपत्र

109 आईएफएस परिवीक्षार्थियों और भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षुओं ने 20 माह का प्रशिक्षण पूरा किया, राजस्थान कैडर की प्रतीक्षा नानासाहेब काले रहीं बैच टॉपर

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Lucknow, 1 Aug, 2026 01:43 PM
देहरादून: आईजीएनएफए में 2024 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारियों का दीक्षांत समारोह, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बांटे प्रमाणपत्र

देहरादून। इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए), देहरादून में शनिवार को 2024 बैच के भारतीय वन सेवा (आईएफएस) परिवीक्षार्थियों का दीक्षांत समारोह वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) के दीक्षांत गृह में आयोजित किया गया। समारोह में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले अधिकारियों को प्रमाणपत्र एवं पदक प्रदान किए।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज प्रशिक्षण पूरा कर रहे युवा अधिकारी वर्ष 2047 में विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के सामने भविष्य में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और मरुस्थलीकरण जैसी गंभीर चुनौतियां होंगी, जिनका समाधान आधुनिक तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी के समन्वय से ही संभव है।

उन्होंने अधिकारियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग केवल आंकड़ों के विश्लेषण तक सीमित न रखकर मानवीय संवेदनाओं के साथ व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक सफल लोकसेवक की पहचान उसकी नैतिकता, कार्यकुशलता, समय के सदुपयोग और सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम देने की क्षमता से होती है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि एक अधिकारी को केवल कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि प्रभावी नेता भी बनना चाहिए। त्याग, करुणा और दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता ही सच्चे नेतृत्व की पहचान है। उन्होंने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि “एक अच्छा अधिकारी वही है, जो सबसे पहले एक अच्छा इंसान हो।” साथ ही अधिकारियों से आत्ममूल्यांकन और निरंतर सीखने की भावना बनाए रखने का आह्वान किया।

इससे पहले आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद खजूरिया ने निदेशक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 1938 से यह संस्थान देश के वन प्रशासन को सक्षम नेतृत्व प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 की परिकल्पना के अनुरूप संशोधित पाठ्यक्रम पर आधारित 20 माह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय वन सेवा के 109 परिवीक्षाधीन अधिकारियों और भूटान के दो अधिकारी प्रशिक्षुओं सहित कुल 111 अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इनमें 75 अधिकारियों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर ऑनर्स डिप्लोमा प्राप्त किया।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान वानिकी, वन्यजीव प्रबंधन, पर्यावरणीय सुशासन, उन्नत प्रौद्योगिकी और नेतृत्व विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। कुल प्रशिक्षण अवधि का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा देश के विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों में आयोजित फील्ड प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण और साहसिक गतिविधियों के लिए निर्धारित था। अधिकारियों ने स्वतंत्र शोध, विशेष वैकल्पिक पाठ्यक्रमों तथा वन प्रबंधन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक अभ्यासों में भी भाग लिया।

समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले परिवीक्षार्थियों को विभिन्न पदक एवं पुरस्कार प्रदान किए गए। राजस्थान कैडर की प्रतीक्षा नानासाहेब काले ने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए बैच टॉपर का गौरव हासिल किया।

दीक्षांत समारोह में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, चेयरमैन-सीईसी सी.पी. गोयल, महानिदेशक आईसीएफआरई कंचन देवी, आईजीएनएफए के अपर निदेशक एन.सी. सरवणन, भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. जी.एस. भारद्वाज, एफआरआई के निदेशक सहित मंत्रालय एवं वानिकी क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षु अधिकारी और उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।


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