ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का शुभारम्भ, धामी बोले—योग सम्पूर्ण जीवन पद्धति

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Lucknow, 16 Mar, 2026 07:57 PM
ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का शुभारम्भ, धामी बोले—योग सम्पूर्ण जीवन पद्धति

टिहरी/मुनिकीरेती। मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने सोमवार को जनपद टिहरी के गंगा रिजॉर्ट, मुनिकीरेती में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव 2026 का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि एक समग्र जीवन पद्धति है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का मार्ग प्रदान करती है।


मुख्यमंत्री ने युवाओं से योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए कहा कि आज के दौर में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने वाले युवाओं में थकावट और तनाव सामान्य हो गया है, ऐसे में योग उनके लिए सबसे बड़ा सहायक साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने योग को बढ़ावा देने के लिए योग नीति 2025 लागू की है। इसके अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जनपद में 50 और 10 बेड वाले आयुष चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं तथा योग और आध्यात्म को प्रोत्साहन देने के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि Garhwal Mandal Vikas Nigam और Uttarakhand Tourism Department के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव पिछले 35 वर्षों से योग की परंपरा को विश्वभर में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सात दिवसीय इस आयोजन में योग, प्राणायाम, ध्यान, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और आध्यात्मिक प्रवचनों के साथ-साथ “रन फॉर योगा”, हेरिटेज वॉक और अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि योग भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि-मुनियों ने योग के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का जो मार्ग दिखाया था, वह आज पूरी दुनिया के लिए स्वस्थ जीवन और मानसिक शांति का आधार बन चुका है।


उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र में 21 जून को International Day of Yoga के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसके परिणामस्वरूप आज विश्व के 180 से अधिक देशों में करोड़ों लोग योग का अभ्यास कर रहे हैं।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं बल्कि योगभूमि भी है। यहां की पवित्र नदियां, शांत वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा योग साधना के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करती हैं। आज Rishikesh को विश्वभर में “योग की राजधानी” के रूप में पहचान मिल चुकी है।


मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में आयुष आधारित 300 से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। साथ ही, ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से नागरिकों को आयुष विशेषज्ञों द्वारा परामर्श भी उपलब्ध कराया जा रहा है। राज्य में आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन भी स्थापित किए जा रहे हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने गढ़वाल मंडल के हर गांव को पर्यटन से जोड़ने वाली “उत्तराखंड खोज योजना” का भी लोकार्पण किया।


कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री Satpal Maharaj ने कहा कि योग हमारी प्राचीन परंपरा का अभिन्न हिस्सा है और हमारे ऋषि-मुनियों ने योग और तप के माध्यम से अद्भुत सिद्धियां प्राप्त की थीं। वहीं वन मंत्री Subodh Uniyal ने कहा कि आज योग के माध्यम से करोड़ों लोग निरोग जीवन की ओर अग्रसर हो रहे हैं।


इस अवसर पर Garhwal Mandal Vikas Nigam के प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन ने बताया कि इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव के लिए 2500 से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं और लगभग 150 योग संस्थाओं के सहयोग से यह आयोजन संपन्न हो रहा है। कार्यक्रम में गुरुकुल कांगड़ी सहित विभिन्न संस्थानों से आए योग साधकों ने योग की विभिन्न क्रियाओं का प्रदर्शन भी किया।


कार्यक्रम में बड़ी संख्या में योग साधक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।


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