‘भुली’ कार्यक्रम का शुभारंभ: उत्तराखंड की 150 महिला उद्यमियों को मिलेगा तकनीकी, वित्तीय और विपणन सहयोग

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Lucknow, 14 Jul, 2026 09:16 PM
‘भुली’ कार्यक्रम का शुभारंभ: उत्तराखंड की 150 महिला उद्यमियों को मिलेगा तकनीकी, वित्तीय और विपणन सहयोग

देहरादून। उत्तराखंड की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और सफल उद्यमी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने मंगलवार को देहरादून में ‘भुली (BHULI) – Business Handholding Unit for Livelihood Incubation’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं के उद्यमों को तकनीकी, प्रबंधकीय, वित्तीय और विपणन सहायता प्रदान कर उन्हें प्रतिस्पर्धी एवं टिकाऊ व्यवसायों के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।

यह पहल ग्राम्य विकास विभाग की दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) तथा उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (USRLM) के तहत भारतीय प्रबंध संस्थान (IIM) काशीपुर की Foundation for Innovation and Entrepreneurship Development (FIED) के सहयोग से संचालित की जाएगी।

ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी बनाने पर सरकार का फोकस

कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं को केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी के रूप में स्थापित करने के लिए हरसंभव सहयोग दे रही है।

उन्होंने कहा कि ‘भुली’ कार्यक्रम स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उद्यमों को नई पहचान देगा और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता तथा बेहतर बाजार उपलब्ध कराएगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

150 महिला उद्यमों का होगा चयन

कार्यक्रम के तहत राज्यभर से कम से कम 150 महिला स्वामित्व अथवा महिला नेतृत्व वाले विकासोन्मुख उद्यमों का चयन किया जाएगा। चयनित उद्यमों को व्यवसाय विस्तार के लिए तकनीकी, प्रबंधकीय, वित्तीय और विपणन संबंधी व्यापक सहयोग प्रदान किया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य इन उद्यमों की उत्पादकता, लाभप्रदता, औपचारिक वित्तीय संस्थानों तक पहुंच, बाजार विस्तार और रोजगार सृजन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। निर्धारित मानकों के अनुसार चयनित उद्यमों के कारोबार में प्रतिवर्ष कम से कम 15 प्रतिशत वृद्धि तथा प्रत्येक उद्यम द्वारा औसतन तीन से चार स्थानीय रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है।

किन उद्यमों को मिलेगा लाभ

इस योजना के अंतर्गत विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा क्षेत्र से जुड़े उद्यमों का चयन किया जाएगा। केवल पुनर्विक्रय (रिटेल ट्रेडिंग), प्राथमिक कृषि उत्पादन या बिना मूल्य संवर्धन वाली गतिविधियों को योजना में शामिल नहीं किया जाएगा।

चयनित उद्यम स्वयं सहायता समूह की सदस्य या उनके परिवार द्वारा संचालित होना चाहिए तथा कम से कम 66 प्रतिशत उद्यम महिला स्वामित्व या महिला नेतृत्व वाले होना अनिवार्य होगा। साथ ही आवेदनकर्ता का सक्रिय स्वयं सहायता समूह सदस्य होना और उद्यम का व्यावसायिक रूप से संचालित होना भी आवश्यक है।

एंड-टू-एंड इनक्यूबेशन मॉडल पर होगा काम

‘भुली’ कार्यक्रम को End-to-End Enterprise Development Model के रूप में तैयार किया गया है। चयनित उद्यमों का सबसे पहले बिजनेस डायग्नोस्टिक असेसमेंट किया जाएगा, जिसके आधार पर प्रत्येक उद्यम के लिए एंटरप्राइज ग्रोथ प्लान तैयार होगा।

इसके बाद व्यवसाय नियोजन, वित्तीय प्रबंधन, डिजिटल लेखांकन, गुणवत्ता सुधार, उत्पाद विकास, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार विश्लेषण, ई-कॉमर्स, सार्वजनिक खरीद, आपूर्ति श्रृंखला विकास तथा निवेशकों और वित्तीय संस्थानों से जोड़ने जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही उद्योग विशेषज्ञों और मेंटर्स का निरंतर मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।

चैलेंज फंड से मिलेगा वित्तीय सहयोग

कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता चैलेंज फंड है। इसके माध्यम से प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया से चयनित उद्यमियों को व्यवसाय विस्तार के लिए अनुदान (ग्रांट) और शून्य प्रतिशत ब्याज पर सॉफ्ट लोन उपलब्ध कराया जाएगा।

यह वित्तीय सहायता उद्यम की विकास योजना के लिए आवश्यक पूंजीगत निवेश और कार्यशील पूंजी की जरूरत का अधिकतम 75 प्रतिशत तक दी जा सकेगी। शेष राशि उद्यमी स्वयं, बैंक ऋण, सामुदायिक निवेश कोष (CIF), CSR अथवा अन्य अभिसरण स्रोतों से जुटाएंगे। कार्यक्रम के दौरान उद्यमों के प्रदर्शन का नियमित मूल्यांकन भी किया जाएगा और उसके आधार पर चरणबद्ध वित्तीय सहायता एवं उन्नत इनक्यूबेशन सेवाएं प्रदान की जाएंगी।

कार्यक्रम में ग्राम्य विकास विभाग की आयुक्त अनुराधा पाल, अपर सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी झरना कमठान, आईआईएम काशीपुर के निदेशक एवं संकाय सदस्य, एफआईईडी के प्रतिनिधि, राज्य के विभिन्न जिलों से आई महिला उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं तथा बड़ी संख्या में “भुली” और “दीदी” उपस्थित रहीं।


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