सहकारिता मेलों से ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती: 21 करोड़ से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण वितरित—डॉ. धन सिंह रावत

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Lucknow, 25 Feb, 2026 06:46 PM
सहकारिता मेलों से ग्रामीण आर्थिकी को मजबूती: 21 करोड़ से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण वितरित—डॉ. धन सिंह रावत

देहरादून, 25 फरवरी 2026। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के अवसर पर प्रदेशभर में आयोजित सहकारिता मेलों के माध्यम से राज्य सरकार ने किसानों, काश्तकारों, युवा उद्यमियों और महिला स्वयं सहायता समूहों को 21 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण वितरित किया है। इन मेलों से 1000 से अधिक किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा लाभ मिला है, जबकि 500 से अधिक महिला समूहों ने अपने उत्पादों का विक्रय कर उल्लेखनीय मुनाफा अर्जित किया।


प्रदेश के सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के तहत स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और ग्रामीण आर्थिकी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सहकारिता मेलों का आयोजन किया जा रहा है। सहकारिता विभाग द्वारा विशेष थीमों पर आधारित इन मेलों का 11 जनपदों में सफल आयोजन हो चुका है, जबकि टिहरी में भी मेला आयोजित किया गया है। इन मेलों में किसानों, काश्तकारों, कारीगरों और महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार उपलब्ध कराया गया, साथ ही विभागीय योजनाओं का लाभ भी आमजन तक पहुंचाया गया।


डॉ. रावत के अनुसार, मेलों के माध्यम से अब तक 1038 किसानों और 147 महिला स्वयं सहायता समूहों को 21 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज मुक्त ऋण वितरित किया गया है। जिला-वार वितरण में अल्मोड़ा में 174 लाख, बागेश्वर में 115 लाख, पिथौरागढ़ में 211 लाख, चम्पावत में 81 लाख, नैनीताल में 107 लाख, चमोली में 155 लाख, रुद्रप्रयाग में 177 लाख, पौड़ी में 583 लाख, हरिद्वार में 71 लाख, देहरादून में 98 लाख तथा उत्तरकाशी में 56 लाख रुपये का ऋण शामिल है। टिहरी जनपद में आयोजित मेले में अब तक 270 लाख रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है।


सहकारिता मंत्री ने कहा कि ये ब्याज मुक्त ऋण पशुपालन, मत्स्य पालन, फूलों की खेती सहित विभिन्न गतिविधियों के लिए दिए जा रहे हैं, जो कृषि विकास, स्वरोजगार, लघु उद्यम और आजीविका संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि सहकारी मेलों में महिला स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार मिलने से महिला सशक्तिकरण को नई गति मिली है। हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य सामग्री, जैविक उत्पाद और पारंपरिक वस्त्रों की बिक्री से महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और आत्मनिर्भरता को बल मिला है।


डॉ. रावत ने कहा कि सहकारिता मेले किसानों, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों के आर्थिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरे हैं। इन आयोजनों ने सहभागिता, आत्मनिर्भरता और सामूहिक विकास जैसे सहकारिता के मूल सिद्धांतों को जमीनी स्तर पर मजबूती दी है। भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन और समावेशी विकास को सशक्त आधार प्रदान किया जाएगा।


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