उत्तराखंड : नीति घाटी में दौड़ेगा एडवेंचर का जुनून

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Lucknow, 20 May, 2026 07:02 PM
उत्तराखंड : नीति घाटी में दौड़ेगा एडवेंचर का जुनून

चमोली। हिमालय की कठिन और मनमोहक वादियों में स्थित नीति घाटी अब साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान गढ़ने की ओर बढ़ रही है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग पहली बार 31 मई से 2 जून 2026 तक “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026” का आयोजन करने जा रहा है। “Beyond the Canyon” थीम पर आधारित यह आयोजन भारतीय सेना और आईटीबीपी के सहयोग से संपन्न होगा। इसे प्रधानमंत्री Narendra Modi के सीमांत क्षेत्रों के विकास संबंधी विजन और मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की ग्रामीण आजीविका व स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की पहल से भी जोड़ा जा रहा है।

ऊंची चोटियों के बीच चुनौतीपूर्ण अल्ट्रा रन

नीति घाटी अपनी बर्फीली चोटियों, विशाल ग्लेशियरों, गहरी दर्रों और पारंपरिक हिमालयी गांवों के लिए प्रसिद्ध है। इस आयोजन का सबसे ऊंचा पड़ाव रिमखिम होगा, जो 4,384 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 75 किलोमीटर लंबी अल्ट्रा रन रिमखिम से आरंभ होकर सुमना, ग्रैंड कैन्यन स्ट्रेच और मलारी से गुजरते हुए नीति गांव में समाप्त होगी। वहीं 42 किलोमीटर की मैराथन नीति क्षेत्र में लूप फॉर्मेट में आयोजित की जाएगी। दौड़ का अधिकांश हिस्सा 3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण प्रतिभागियों को कम ऑक्सीजन, तेज हवाओं और कठिन भूभाग जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। आयोजकों के मुताबिक यह दुनिया की छठी और भारत की चौथी सबसे ऊंचाई पर आयोजित होने वाली अल्ट्रा रन होगी।

देश-विदेश से बढ़ा आकर्षण, सुरक्षा पर विशेष फोकस

इस अल्ट्रा रन को लेकर देश और विदेश के धावकों में उत्साह देखा जा रहा है। अब तक 908 प्रतिभागी पंजीकरण करा चुके हैं, जिनमें भारत के 27 राज्यों के धावकों के साथ दो विदेशी देशों के प्रतिभागी भी शामिल हैं। सभी प्रतिभागियों के लिए मेडिकल जांच अनिवार्य की गई है। आयोजन स्थल पर मेडिकल टीम, सपोर्ट स्टेशन, ऑक्सीजन सुविधा और आपातकालीन हेलीकॉप्टर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

अल्ट्रा रन से बदली घाटी की आर्थिक तस्वीर

10 नवंबर 2025 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आयोजन के लोगो लॉन्च और इसकी घोषणा के बाद नीति घाटी में होमस्टे संस्कृति को नई गति मिली है। बीते चार महीनों में पंजीकृत होमस्टे कमरों की संख्या 35 से बढ़कर 265 से अधिक हो गई है, जबकि बेड क्षमता 630 के पार पहुंच चुकी है। स्थानीय लोग अपने पारंपरिक घरों को पर्यटकों के लिए होमस्टे के रूप में विकसित कर रहे हैं। इससे युवाओं को गाइडिंग, परिवहन, खान-पान, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े नए रोजगार अवसर मिलने लगे हैं।

उपेक्षा से उभरकर पर्यटन केंद्र बनने की ओर नीति घाटी

1962 के युद्ध के बाद लंबे समय तक सीमित गतिविधियों वाली नीति घाटी अब सरकारी प्रयासों के चलते नए विकास की राह पर आगे बढ़ रही है। द्रोणागिरी ट्रैक, टिम्मरसैंण महादेव और भविष्य बद्री जैसे धार्मिक एवं एडवेंचर पर्यटन स्थलों के कारण यहां पर्यटन संभावनाएं तेजी से बढ़ी हैं। सरकार विदेशी पर्यटकों के लिए इनर लाइन परमिट समाप्त करने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार के समक्ष भेजने की तैयारी में है।

पर्यटन को वैश्विक पहचान देने की तैयारी

पर्यटन सचिव Dheeraj Garbyal ने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं बल्कि उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय एडवेंचर टूरिज्म हब बनाने की रणनीति का हिस्सा है। इससे दूरस्थ सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

पर्यावरण संरक्षण पर रहेगा विशेष ध्यान

आयोजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी। आयोजकों द्वारा “लीव नो ट्रेस” सिद्धांत का पालन सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और पारिस्थितिकी सुरक्षित बनी रहे।

स्थानीयों में उत्साह, उम्मीदों को मिलेगी नई उड़ान

नीति गांव की ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी राणा ने कहा कि पहले यहां बहुत कम पर्यटक आते थे, लेकिन अल्ट्रा रन की घोषणा के बाद गांव में जबरदस्त उत्साह है और लोग तेजी से होमस्टे तैयार कर रहे हैं। वहीं नीति टिम्मरसैंण सेवा समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि प्रधानमंत्री के वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और मुख्यमंत्री के प्रयासों से नीति घाटी अब साहसिक पर्यटन का नया केंद्र बनने जा रही है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह पहल केवल खेल आयोजन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की उम्मीदों, रोजगार और विकास से जुड़ी नई संभावनाओं को भी गति देगी।


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