साइबर अपराध नियंत्रण में उत्तराखंड पुलिस देश के टॉप-5 राज्यों में, PMO की PRAGATI समीक्षा में मिली बड़ी उपलब्धि

मुख्यमंत्री धामी ने पुलिस टीम को दी बधाई, बोले- आधुनिक तकनीक और प्रतिबद्धता से मजबूत हो रहा सुरक्षित साइबर इकोसिस्टम

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Lucknow, 8 Aug, 2026 10:23 PM
साइबर अपराध नियंत्रण में उत्तराखंड पुलिस देश के टॉप-5 राज्यों में, PMO की PRAGATI समीक्षा में मिली बड़ी उपलब्धि

देहरादून, 8 अगस्त। साइबर अपराध नियंत्रण, पीड़ित सहायता और तकनीक आधारित पुलिसिंग के क्षेत्र में उत्तराखंड पुलिस ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से 6 अगस्त 2026 को आयोजित PRAGATI समीक्षा बैठक में प्रस्तुत State/UT Performance Matrix (1 जनवरी से 31 जुलाई 2026) के अनुसार उत्तराखंड को साइबर अपराध प्रबंधन के क्षेत्र में देश के शीर्ष पांच राज्यों में स्थान मिला है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि पर उत्तराखंड पुलिस की पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण एवं संतुष्टि’ की कार्यसंस्कृति, आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल और पुलिस की प्रतिबद्धता का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि उत्तराखंड पुलिस भविष्य में भी साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण, नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा और सुरक्षित साइबर इकोसिस्टम के निर्माण के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ काम करेगी।


I4C की राष्ट्रीय पहलों के क्रियान्वयन के आधार पर हुआ मूल्यांकन


PRAGATI समीक्षा के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन गृह मंत्रालय के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) की ओर से संचालित विभिन्न राष्ट्रीय साइबर पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन के आधार पर किया गया।


इस मूल्यांकन में State Cyber Crime Coordination Centre (S4C), e-Zero FIR, Grievance Redressal Module (GRM), Money Restoration Module (MRM), Sahyog Portal, Samanvaya, सूचना साझाकरण, CIAR अनुपालन, CyTrain क्षमता निर्माण, राष्ट्रीय साइबर हॉटस्पॉट विश्लेषण और साइबर जागरूकता (IEC) जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया गया।


पुलिस मुख्यालय के अनुसार इन प्रमुख मानकों में उत्तराखंड का प्रदर्शन प्रभावी रहा और विशेष रूप से S4C, e-Zero FIR, GRM, MRM, Sahyog Portal, Samanvaya, सूचना साझाकरण तथा साइबर जागरूकता अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पांच राज्यों में स्थान मिला।


उत्तराखंड में US4C की स्थापना


राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में उत्तराखंड स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (US4C) की स्थापना के लिए अधिसूचना जारी की है। इसके साथ ही US4C के लिए पृथक भवन और आवश्यक आधारभूत ढांचे के विकास के लिए बजट का प्रावधान किया गया है।


पुलिस के अनुसार इससे राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम, नियंत्रण और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक समर्पित संस्थागत व्यवस्था विकसित हो रही है।


STF और I4C के सहयोग से साइबर अपराध पर कार्रवाई


उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की ओर से I4C के सहयोग से साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच, तकनीकी सहायता, अंतरराज्यीय समन्वय और पीड़ित सहायता व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।


पुलिस के अनुसार e-Zero FIR प्रणाली के तहत प्राप्त पात्र शिकायतों पर समयबद्ध तरीके से मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं Money Restoration Module (MRM) के जरिए साइबर ठगी के पीड़ितों की धनराशि को सुरक्षित कराने और वापस दिलाने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है।


म्यूल बैंक खातों पर भी कार्रवाई


संगठित साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की ओर से म्यूल बैंक खातों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत संदिग्ध खातों की पहचान, उन्हें फ्रीज कराने और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा रही है।


इसके अलावा GRM, Sahyog Portal और Samanvaya Portal के माध्यम से शिकायतों के त्वरित निस्तारण, अवैध ऑनलाइन सामग्री के खिलाफ कार्रवाई और विभिन्न राज्यों के बीच समन्वय को मजबूत किया जा रहा है।


साइबर हॉटस्पॉट की निगरानी और पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग


उत्तराखंड पुलिस के मुताबिक साइबर अपराध के हॉटस्पॉट की पहचान और उनकी लगातार निगरानी के लिए तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित की गई है। वहीं CyTrain और Cyber Commando Programme के माध्यम से पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देकर उनकी तकनीकी क्षमता बढ़ाई जा रही है।


साइबर अपराधों से बचाव के लिए विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और आम नागरिकों के बीच भी राज्यभर में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।


1930 हेल्पलाइन से तत्काल सहायता


साइबर अपराध के पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए उत्तराखंड में 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 24×7 संचालित है। इसके अलावा US4C की GRM और MRM टीमें शिकायतों के निस्तारण, ठगी की रकम को सुरक्षित कराने और आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही हैं।


पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने कहा कि PMO की PRAGATI समीक्षा में साइबर अपराध नियंत्रण एवं प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तराखंड का देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल होना राज्य पुलिस के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार के मार्गदर्शन और उत्तराखंड पुलिस, STF तथा संबंधित इकाइयों के समन्वित एवं तकनीक आधारित प्रयासों का परिणाम है।


उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पुलिस का लक्ष्य केवल साइबर अपराधों पर नियंत्रण करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पीड़ित को समय पर सहायता उपलब्ध कराना और नागरिकों के लिए सुरक्षित डिजिटल वातावरण तैयार करना भी है। भविष्य में आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ प्रशिक्षण और जन-जागरूकता के माध्यम से साइबर अपराध के खिलाफ अभियान को और मजबूत किया जाएगा।


पुलिस की नागरिकों से अपील


उत्तराखंड पुलिस ने नागरिकों से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN, CVV, बैंक खाते या डेबिट/क्रेडिट कार्ड से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें। संदिग्ध लिंक, मोबाइल ऐप और फोन कॉल से भी सावधान रहने की सलाह दी गई है।


यदि कोई व्यक्ति साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है तो उसे तुरंत 1930 पर कॉल करने या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है। पुलिस के मुताबिक समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को सुरक्षित कराने और वापस प्राप्त करने की संभावना बढ़ जाती है।


सतर्क रहें, सुरक्षित रहें—साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा है।

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