सरकारी आवास में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने निकाला शहद, 30 बक्सों से मिला 60 किलो से अधिक उत्पादन
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 18 Apr, 2026 06:58 PMदेहरादून। उत्तराखंड के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अपने शासकीय आवास में स्थापित मधुमक्खी पालन इकाई से शहद निकाला। इस दौरान 30 मधुमक्खी बक्सों से 60 किलोग्राम से अधिक शहद प्राप्त हुआ। मंत्री ने तकनीकी विशेषज्ञों से शहद उत्पादन की पूरी प्रक्रिया की जानकारी भी ली।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में 9 हजार से अधिक किसान व्यावसायिक रूप से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 3300 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा कई किसान छोटे स्तर पर भी इस कार्य से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि किसान मुख्य रूप से इंडिका और मेलिफेरा प्रजातियों की मधुमक्खियों से शहद उत्पादन कर रहे हैं।
हर जिले में बन रहे मधुग्राम
मंत्री जोशी ने बताया कि राज्य सरकार ने हर जिले में एक मधुग्राम चयनित किया है, जबकि चंपावत और देहरादून में दो-दो मधुग्राम विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम है, खासकर उन किसानों के लिए जिनके पास खेती योग्य भूमि कम है।
80 प्रतिशत तक अनुदान दे रही सरकार
उन्होंने बताया कि राज्य में शहद प्रसंस्करण के लिए 13 मधु प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हैं, जिनकी क्षमता 200 मीट्रिक टन प्रतिदिन से अधिक है। केंद्र पोषित बागवानी मिशन योजना के तहत 40 प्रतिशत अनुदान और राज्य सेक्टर की मधुग्राम योजना के तहत 40 प्रतिशत टॉपअप देकर कुल 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।
इसके अलावा परागण के लिए परिवहन पर 750 रुपये प्रति बॉक्स अनुदान तथा राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन योजना के तहत इकाई स्थापना पर 90 प्रतिशत तक सहायता दी जा रही है।
110 करोड़ की नीति से मिलेगा बढ़ावा
कृषि मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को शहद और सह-उत्पादों के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए 110 करोड़ रुपये से अधिक लागत की मधुमक्खी पालन नीति को मंजूरी दी गई है। इसके तहत विस्तृत वैल्यू चेन विकसित कर किसानों और मधुमक्खी पालकों को 80 प्रतिशत तक अनुदान का लाभ दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में उत्पादित शहद उच्च गुणवत्ता का है और सरकार किसानों को प्रशिक्षण, तकनीक और सुविधाएं देकर उनकी आय बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।
इस अवसर पर बागवानी मिशन के निदेशक महेंद्र पाल, मुख्य उद्यान अधिकारी डॉ. डी.के. तिवारी, पिंकी स्वयं सहायता समूह की पिंकी, किरण समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।


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