उत्तराखंड में 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' लागू, अब 125 दिन मिलेगा रोजगार; मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन

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Lucknow, 1 Jul, 2026 09:57 PM
उत्तराखंड में 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' लागू, अब 125 दिन मिलेगा रोजगार; मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन

देहरादून: उत्तराखंड में ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1 जुलाई 2026 से 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' लागू कर दी गई है। यह योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत शुरू की गई है और राज्य में महात्मा गांधी नरेगा योजना के स्थान पर लागू होगी। योजना के तहत अकुशल श्रमिकों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार का प्रावधान किया गया है।

योजना के अंतर्गत कुल 318 प्रकार के कार्य अनुमन्य किए गए हैं। इनमें 107 जल संरक्षण, 88 ग्रामीण आधारभूत अवसंरचना, 86 ग्रामीण आजीविका तथा 37 आपदा न्यूनीकरण से संबंधित कार्य शामिल हैं। भारत सरकार ने राज्य के लिए 1 जुलाई 2026 से 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दर निर्धारित की है।

सचिव ग्राम्य विकास धीराज गर्ब्याल ने बताया कि प्रदेश में 91.57 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों की ई-केवाईसी पूरी की जा चुकी है। उन्होंने शेष जॉब कार्ड धारकों और श्रमिकों से अपील की कि वे अगले एक सप्ताह के भीतर अपनी संबंधित ग्राम पंचायत या विकासखंड कार्यालय में पहुंचकर ई-केवाईसी अवश्य करा लें, ताकि उन्हें नई योजना के तहत बिना किसी बाधा के रोजगार मिल सके।

उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी नरेगा के जिन सक्रिय श्रमिकों की ई-केवाईसी पहले ही पूरी हो चुकी है, उनके मौजूदा जॉब कार्ड 'विकसित भारत-जी राम जी योजना' के तहत नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक वैध रहेंगे।

धीराज गर्ब्याल ने कहा कि नरेगा के तहत वर्तमान में चल रहे कार्यों को नई योजना में अनुमन्य कार्यों के अनुसार समाहित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों के क्षमता विकास हेतु जिला स्तर पर कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी।

PMAY-G 2.0 सर्वे सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज

सचिव ग्राम्य विकास ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G 2.0) के तहत लाभार्थियों की सर्वे सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। इसके लिए राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा की खुली बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। 10 जुलाई 2026 तक इन बैठकों के माध्यम से चिन्हित लाभार्थियों की पात्रता का सत्यापन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि यदि किसी पात्र परिवार का नाम सर्वेक्षण में छूट गया है तो ग्राम सभा के संज्ञान में आने पर विकासखंड स्तर के अधिकारी ऐसे परिवारों की सूची तैयार कर संबंधित जनपद को भेजेंगे। सभी जनपदों को यह सूची 6 जुलाई 2026 तक शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समय रहते इसे भारत सरकार को भेजकर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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