उत्तराखंड : अब नहीं चलेगी मनमानी, अवैध निर्माण और पर्यावरणीय छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई

एमडीडीए का सख्त संदेश: अवैध निर्माण पर बुलडोजर, नक्शों में नहीं छिपेंगे पेड़-नाले

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Lucknow, 8 Jun, 2026 10:25 AM
उत्तराखंड : अब नहीं चलेगी मनमानी, अवैध निर्माण और पर्यावरणीय छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई

देहरादून : अवैध मस्जिद, मजारों और प्लाटिंग पर एमडीडीए की सख्त कार्यवाही लगातार जारी है और अवैध निर्माण गिराये जा रहे है, इस मुहिम पर मसूरी देहरादून डेवलपमेंट अथॉरिटी ने भू माफियाओं और ग़ैर कानूनी तरीक़े से भवन निर्माण करने वालों को चेतावनी दी है अगर नियमों का पालन नहीं हुआ और बगैर नक्शे के निर्माण हुआ तो सरकार का बुलडोजर चलेगा और कोई भी बख्शा नहीं जाएगा। नियम और कानून सभी के लिए समान हैं। गौरतलब है कि पिछले कई महीनों से अवैध निर्माण और सरकारी ज़मीनों पर अवैध क़ब्ज़े को लेकर सरकार का रुख़ सख़्त है जिसके तहत हाल ही में देहरादून के थानो क्षेत्र की मस्जिद को सील किया गया है और कई अवैध निर्माण तोड़े गए हैं जिसकी वजह से भू माफिया हिले हुए हैं। 


उत्तराखंड सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री धामी के कड़े दिशा निर्देशों का पालन करते हुए एमडीडीए द्वारा सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण ध्वस्तिकरण की कार्यवाही लगातार जारी है। इस संबंध में एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया की “दून की पहचान उसकी हरित विरासत, प्राकृतिक जलधाराओं और पर्यावरणीय संतुलन से है। इसलिए अब विकास कार्यों को भी इसी संतुलन के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।” उनका कहना है कि शहर का विकास जारी रहेगा, लेकिन प्रकृति और पर्यावरणीय मूल्यों की अनदेखी करके नहीं।


एमडीडीए को लगातार ऐसी शिकायतें प्राप्त हो रही थीं कि कई निर्माण परियोजनाओं के मानचित्रों में ग्रीन एरिया तो दर्शाया जाता है, लेकिन स्थल पर मौजूद पुराने और बड़े पेड़ों का उल्लेख नहीं किया जाता। इसके अलावा कई मामलों में प्राकृतिक जल निकासी तंत्र और नालों को भी नक्शों में शामिल नहीं किया जाता था। ऐसे मामलों में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव सामने आते थे। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्राधिकरण ने मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और कठोर बनाने का निर्णय लिया है।


नक्शे में देनी होगी स्थल की पूरी जानकारी


नई व्यवस्था के अनुसार प्रस्तावित निर्माण स्थल पर मौजूद पेड़ों की संख्या और उनकी प्रजातियों का विवरण देना अनिवार्य होगा। साथ ही नाले-खाले, हाईटेंशन लाइन, रेलवे लाइन, पुरानी संरचनाएं, पहुंच मार्ग तथा पार्किंग जैसी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां भी मानचित्र में दर्शानी होंगी। बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स के लिए पौधारोपण की विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करना भी जरूरी किया गया है।


गलत जानकारी मिलने पर होगी कड़ी कार्रवाई


प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि निरीक्षण के दौरान मानचित्र में दर्शाई गई जानकारी और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो संबंधित नक्शा तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। इसके अलावा संबंधित आर्किटेक्ट, ड्राफ्ट्समैन अथवा आवेदक के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में उन्हें भविष्य में प्राधिकरण के कार्यों के लिए अयोग्य घोषित करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।


शहरी विस्तार से हरित पहचान पर बढ़ा दबाव


पिछले कुछ वर्षों में देहरादून में तेज गति से हुए शहरी विकास का असर शहर के हरित स्वरूप पर दिखाई देने लगा है। नई कॉलोनियों, अपार्टमेंट्स और व्यावसायिक परियोजनाओं के विस्तार के चलते बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो दून घाटी का मौसम, भूजल स्तर और प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो सकता है।


विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ


एमडीडीए का मानना है कि भविष्य के विकास कार्यों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसी सोच के तहत निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया में हरियाली और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को भी महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है।


जमीनी सत्यापन के बाद ही मिलेगी मंजूरी


प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि मानचित्र जमा होने के बाद अधिकारियों द्वारा स्थल का भौतिक निरीक्षण किया जाएगा। प्रस्तुत जानकारी सही पाए जाने पर ही अंतिम स्वीकृति प्रदान की जाएगी। अर्थात अब केवल दस्तावेजों के आधार पर नहीं, बल्कि स्थल की वास्तविक स्थिति का सत्यापन होने के बाद ही परियोजनाओं को अनुमति मिलेगी।


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