ग्लेशियर झीलों की प्रभावी निगरानी जरूरी : मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन

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Lucknow, 4 May, 2026 04:40 PM
ग्लेशियर झीलों की प्रभावी निगरानी जरूरी : मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन

देहरादून। Anand Bardhan ने कहा है कि राज्य में ग्लेशियर झीलों की प्रभावी निगरानी अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए आधुनिक उपकरणों की स्थापना का कार्य जल्द शुरू किया जाए। मुख्य सचिव ने सोमवार को सचिवालय में भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली, राष्ट्रीय भूकम्प जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम, ग्लेशियर झील विस्फोट जोखिम न्यूनीकरण और भूस्खलन न्यूनीकरण से जुड़े कार्यों की समीक्षा करते हुए यह निर्देश दिए।


बैठक में Wadia Institute of Himalayan Geology और उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा ग्लेशियर झीलों की निगरानी और जोखिम न्यूनीकरण की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना प्रस्तुत की गई। सचिव आपदा प्रबंधन Vinod Kumar Suman ने बताया कि वसुंधरा झील को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां अत्याधुनिक अर्ली वार्निंग सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग मैकेनिज्म स्थापित किए जाएंगे। इस मॉडल को आगे अन्य संवेदनशील ग्लेशियर झीलों पर भी लागू किया जाएगा।


मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि संस्थान वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए विस्तृत टाइमलाइन प्रस्तुत करे और न्यूनीकरण उपायों का स्पष्ट खाका तैयार किया जाए, जिसमें अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, पानी के नियंत्रित निकास और झील के स्तर को कम करने जैसे उपाय शामिल हों।


भूकम्प पूर्व चेतावनी प्रणाली की समीक्षा करते हुए बताया गया कि राज्य में अब तक 169 सेंसर और 112 सायरन स्थापित किए जा चुके हैं। IIT Roorkee के सहयोग से अर्ली वार्निंग सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है। 26 फरवरी 2026 को आईआईटी रुड़की के साथ हुए एमओयू के तहत ईईडब्ल्यूएस प्रणाली के संचालन और अनुरक्षण का कार्य जारी है।


राष्ट्रीय भूकम्प जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों में 500 स्ट्रॉन्ग मोशन सेंसर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा चेतावनी तंत्र को और प्रभावी बनाने के लिए 526 नए सेंसर और सायरन लगाने की योजना है।


बैठक में यह भी बताया गया कि National Centre for Seismology के तहत देश में 167 सिस्मोलॉजिकल वेधशालाएं संचालित हैं, जिनमें से 8 उत्तराखण्ड में हैं। राज्य में भूकम्प निगरानी को और सुदृढ़ करने के लिए रुड़की, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, रामनगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा, केदारनाथ और चकराता में नई वेधशालाएं स्थापित करने का प्रस्ताव है।


मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक और त्वरित बनाया जाए तथा आमजन तक अलर्ट संदेश समयबद्ध तरीके से पहुंचाए जाएं।


भूस्खलन और मलबा बहाव (डिब्रिस फ्लो) को लेकर भी समीक्षा की गई। चमोली, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिलों में 48 संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है, जिन्हें जोखिम के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। इन स्थानों पर प्राथमिकता के आधार पर सर्वेक्षण और निवारक कार्य किए जाएंगे।


इसके लिए विभिन्न संस्थानों की संयुक्त समिति गठित की गई है, जिसमें Geological Survey of India, Central Building Research Institute, Indian Institute of Remote Sensing सहित अन्य संस्थाएं शामिल हैं।


मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिला प्रशासन और तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और आपदा न्यूनीकरण कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए।


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