न्याय अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यही व्यवस्था की असली सफलता: धामी

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Lucknow, 12 Apr, 2026 09:14 PM
न्याय अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, यही व्यवस्था की असली सफलता: धामी

देहरादून, 12 अप्रैल। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि न्याय व्यवस्था की वास्तविक सफलता तभी सुनिश्चित होती है, जब न्याय समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे। उन्होंने कहा कि न्याय प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ उससे जुड़ी सभी बाधाओं को दूर करना समय की आवश्यकता है।


राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली के तत्वावधान में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा देहरादून में आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का शनिवार को भव्य समापन हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” तथा मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” रही।


सम्मेलन के समापन अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि), भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं नालसा के संरक्षक-प्रधान न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, उच्चतम न्यायालय एवं उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण, उत्तर भारत के विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए न्यायाधीश तथा विधि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।


कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने स्वागत संबोधन दिया तथा अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।


सम्मेलन में उत्तराखंड के सभी जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की। विभिन्न तकनीकी सत्रों में न्याय तक पहुंच को सशक्त बनाने, वंचित वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा तथा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने पर विस्तृत मंथन किया गया।


सम्मेलन के दौरान वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास तथा महिलाओं और बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।


इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। वहीं नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने ई-बुकलेट का विमोचन किया।


मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि आदिवासी समुदायों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास, महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा तथा कारागार सुधार जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नालसा द्वारा संचालित वीर परिवार सहायता योजना, लीगल सर्विस क्लीनिक, स्प्रुहा, जागृति एवं मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी योजनाओं की सराहना की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड, फास्ट ट्रैक कोर्ट्स और डिजिटल केस मैनेजमेंट जैसे सुधारों के माध्यम से न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बना रही है। वहीं राज्य सरकार डिजिटल कोर्ट्स, ई-फाइलिंग, वर्चुअल हियरिंग तथा समान नागरिक संहिता लागू कर न्याय व्यवस्था को आधुनिक और मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।


उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड सहित पूरे देश के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।


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