ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का ओडिशा के पत्रकारों ने किया निरीक्षण, 37 हजार करोड़ की लागत से बन रही 125 किमी रेल लाइन

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Lucknow, 13 Mar, 2026 11:09 PM
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का ओडिशा के पत्रकारों ने किया निरीक्षण, 37 हजार करोड़ की लागत से बन रही 125 किमी रेल लाइन

देहरादून, 13 मार्च (युगवार्ता)। हिमालयी क्षेत्र में बन रही महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का जायजा लेने के लिए ओडिशा के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को ऋषिकेश में परियोजना स्थल का दौरा किया। यह प्रेस टूर भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) भुवनेश्वर द्वारा उत्तराखंड में आयोजित किया गया है।


दौरे के दौरान रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के डीजीएम (सिविल) ओम प्रकाश मालगुरी ने पत्रकारों का स्वागत करते हुए परियोजना की प्रगति और इसकी तकनीकी चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन हिमालयी क्षेत्र में शुरू की गई सबसे चुनौतीपूर्ण रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाना है।


अधिकारियों के अनुसार लगभग 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का निर्माण करीब 37 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जा रहा है। यह रेल मार्ग ऋषिकेश से शुरू होकर गढ़वाल के दुर्गम पर्वतीय इलाकों से गुजरते हुए कर्णप्रयाग तक पहुंचेगा। यह परियोजना उत्तराखंड के देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरेगी, जिससे पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा।


परियोजना की इंजीनियरिंग विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए अधिकारियों ने बताया कि रेल मार्ग का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरेगा, जिससे यह देश की सबसे अधिक सुरंगों वाली रेल परियोजनाओं में शामिल हो गई है। इस परियोजना के तहत 100 किलोमीटर से अधिक लंबाई की 16 बड़ी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा गहरी घाटियों और पहाड़ी नदियों पर कई बड़े पुल भी बनाए जा रहे हैं।


मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने दौरे के दौरान प्रस्तावित शिवपुरी स्टेशन तक जाने वाली सुरंग का भी निरीक्षण किया। पत्रकारों ने सुरंग के भीतर पैदल चलकर निर्माण कार्य को करीब से देखा और हिमालयी चट्टानों को काटकर बनाई जा रही सुरंगों की अत्याधुनिक इंजीनियरिंग को समझा।


आरवीएनएल के अधिकारियों ने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों तक आवागमन आसान होगा और राज्य के प्रमुख धार्मिक व पर्यटन स्थलों तक पहुंच में बड़ा सुधार आएगा। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।


इस मीडिया दौरे में ओडिशा के नौ वरिष्ठ पत्रकार शामिल थे। उनके साथ PIB भुवनेश्वर के सहायक निदेशक महेंद्र जेना और सूचना सहायक विकास रंजन दलाई भी मौजूद रहे, जबकि PIB देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल भी इस दौरान उपस्थित रहे।


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