खेती हमारी संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मा है” : धामी
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 15 Jun, 2026 01:39 PMखटीमा, 15 जून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को ऊधम सिंह नगर जिले के खटीमा स्थित अपने निजी आवास नगला तराई में खेत पर पहुंचकर स्वयं टिलर चलाया और खेत की जुताई कर कृषि कार्यों में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने खेत में गोबर की प्राकृतिक खाद डालकर प्रदेश में जैविक एवं पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने का संदेश दिया। उनके साथ उनकी माता बिशना देवी भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री धामी ने खेत में श्रम करते हुए किसानों के कठिन परिश्रम, समर्पण और कृषि परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश की आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के साथ पारंपरिक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर कृषि क्षेत्र को अधिक समृद्ध, टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर की खाद जैसी प्राकृतिक पद्धतियां न केवल भूमि की उर्वरता को बढ़ाती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करते हुए जैविक और प्राकृतिक खेती को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक बनाने और जैविक उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए लगातार काम कर रही है। उत्तराखंड की पहचान कृषि, ग्रामीण संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी हुई है, इसलिए सरकार पारंपरिक खेती, बागवानी, प्राकृतिक कृषि और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि युवा पीढ़ी को खेती और ग्रामीण विकास से जोड़ना आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि कृषि क्षेत्र को भविष्य के लिए और अधिक मजबूत बनाया जा सके।



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