उत्तराखंड : केदारनाथ में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान सफल, एक सप्ताह में 1000 किलो प्लास्टिक वेस्ट एकत्र

ग्रीन चारधाम यात्रा की पहल रंग लाई, कचरे को 15 श्रेणियों में बांटकर किया जा रहा प्रबंधन

YUGVARTA NEWS

YUGVARTA NEWS

Lucknow, 30 Apr, 2026 04:59 PM
उत्तराखंड : केदारनाथ में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान सफल, एक सप्ताह में 1000 किलो प्लास्टिक वेस्ट एकत्र

केदारनाथ/देहरादून:
चारधाम यात्रा के दौरान केदारनाथ धाम में उमड़ रही तीर्थयात्रियों की भीड़ के बीच स्वच्छता बनाए रखने के प्रयास असर दिखा रहे हैं। ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत नगर पंचायत केदारनाथ ने यात्रा के पहले ही सप्ताह में करीब 1000 किलो प्लास्टिक वेस्ट एकत्र कर उसे कॉम्पेक्ट कर लिया है।


धाम के कपाट 22 अप्रैल को खुलने के साथ ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे प्लास्टिक कचरे—विशेषकर पानी की बोतलों—की मात्रा बढ़ी है। हालांकि नगर पंचायत ने इसके लिए पहले से तैयारी कर रखी थी। धाम में करीब 3000 वर्गफीट क्षेत्र में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) स्थापित की गई है, जहां प्लास्टिक समेत अन्य ठोस कचरे को एकत्र कर 15 अलग-अलग श्रेणियों में छांटा जा रहा है।


यहां स्थापित कॉम्पेक्टर मशीन प्लास्टिक बोतलों और अन्य कचरे को पिचकाकर 30 से 40 किलो की गठरियों में बदल रही है, जिससे उनके परिवहन और निस्तारण में सुविधा हो रही है।


नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी नीरज कुकरेती के अनुसार, एकत्रित प्लास्टिक वेस्ट को बेचा जाएगा, जिससे नगर पंचायत को राजस्व भी प्राप्त होगा। कांच, टिन और अन्य कचरे को भी अलग-अलग एकत्र किया जा रहा है, जिसे बाद में सोनप्रयाग ले जाकर कबाड़ के रूप में बेचा जाएगा।


धाम में स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रतिदिन दो शिफ्ट में सफाई कराई जा रही है, जिसके लिए 55 सफाई कर्मी तैनात किए गए हैं। वहीं यात्रा मार्ग पर अलग संस्था द्वारा सफाई व्यवस्था संभाली जा रही है, जिससे संपूर्ण क्षेत्र में स्वच्छता बनी हुई है।


प्रधानमंत्री की अपील का असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उत्तराखंड आने वाले तीर्थयात्रियों से सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल न करने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग की अपील कर चुके हैं। हाल ही में देहरादून दौरे के दौरान उन्होंने अपनी प्रमुख अपीलों में इस मुद्दे को शामिल किया था।


मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड अपनी धार्मिक आस्था के साथ-साथ नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने तीर्थयात्रियों से अपील की कि वे धामों और यात्रा मार्गों पर प्लास्टिक या अन्य कचरा न फैलाएं।


उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तीर्थ स्थलों, पवित्र नदियों और हिमालयी पर्यावरण के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जिसमें स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है।


सर्वाधिक पसंद

Leave a Reply

comments

Loading.....
  1. No Previous Comments found.

moti2