देहरादून को ट्रैफिक जाम से मिलेगी बड़ी राहत, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ेगा 12 किमी ग्रीनफील्ड बाईपास
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 24 Apr, 2026 09:24 AMदेहरादून, 23 अप्रैल 2026। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा 12 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड चार-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड बाईपास का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। यह परियोजना दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़कर शहर के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगी।
करीब 716 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस बाईपास का लगभग 44 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे अप्रैल 2027 तक पूरा किए जाने की संभावना है।
झाझरा से आशारोड़ी तक बनेगा नया संपर्क मार्ग
यह बाईपास झाझरा से शुरू होकर पांवटा साहिब-बल्लूपुर (NH-7) सेक्शन को जोड़ते हुए आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर से जुड़ेगा। इसके चालू होने के बाद बाहरी और भारी वाहनों को शहर के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग मिलेगा।
देहरादून शहर को मिलेगा राहत भरा ट्रैफिक समाधान
परियोजना पूरी होने के बाद देहरादून शहर के अंदर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण में कमी आएगी। साथ ही शहर की आवाजाही व्यवस्था अधिक सुगम और तेज होगी।
यह मार्ग सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र, विकासनगर, हर्बर्टपुर तथा पांवटा साहिब (हिमाचल प्रदेश) की ओर जाने वाले यातायात को भी सरल बनाएगा। इसके अलावा हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश सहित उत्तरी राज्यों से संपर्क बेहतर होगा।
पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण पर विशेष ध्यान
परियोजना को पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। सड़क की डिजाइन गति 100 किमी प्रति घंटा रखी गई है, जबकि वन क्षेत्रों में इसे 80 किमी प्रति घंटा सीमित किया गया है। वन क्षेत्र को कम प्रभावित करने के लिए राइट ऑफ वे को 30 मीटर तक सीमित रखा गया है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए परियोजना में 350 मीटर लंबा व्हीक्युलर ओवरपास, एक कैटल ओवरपास, 7 छोटे पुल, 21 बॉक्स कल्वर्ट और छोटे जीवों के लिए 5 ह्यूम पाइप कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं।
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
यह बाईपास बनने के बाद मसूरी सहित उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों को भी गति मिलेगी। साथ ही नागरिकों के जीवन स्तर और शहरी सुविधाओं में भी सुधार होगा।


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