मानसून से पहले अलर्ट मोड में उत्तराखंड, धामी ने आपदा तैयारियों को परखा
YUGVARTA NEWS
Lucknow, 2 Jul, 2026 09:18 PMदेहरादून। मानसून सीजन से पहले उत्तराखंड सरकार ने आपदा प्रबंधन तैयारियों को लेकर बड़ा अभ्यास किया। गुरुवार को देहरादून के आईटी पार्क में आयोजित राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल के दौरान मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून के दौरान किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संभावित आपदाओं से निपटने के लिए पूर्व तैयारी, तेज निर्णय क्षमता, बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों का उपयोग बेहद जरूरी है।
धामी ने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को हाईटेक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके तहत एआई आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस, जीआईएस मैपिंग, सैटेलाइट मॉनिटरिंग और डेटा आधारित रिस्क असेसमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों को जोड़ा जा रहा है, ताकि समय रहते खतरे का सटीक आकलन कर नुकसान को कम किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने सभी 13 जिलों को निर्देश दिए कि मॉक ड्रिल के दौरान सामने आई कमियों की समीक्षा कर 72 घंटे के भीतर रिपोर्ट Uttarakhand State Disaster Management Authority को सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि हर नागरिक तक आपदा सुरक्षा उपायों, आपातकालीन नंबरों और जरूरी सावधानियों की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने State Disaster Response Force, National Disaster Response Force और अग्निशमन विभाग की ओर से लगाए गए आधुनिक राहत एवं बचाव उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में अंडरवॉटर ड्रोन, सोनार सिस्टम, थर्मल इमेजिंग कैमरा, नाइट विजन कैमरा और सीबीआरएनई आपदाओं में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक उपकरण प्रमुख आकर्षण रहे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रबंधन योजना (SDMP) और सभी 13 जिलों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं (DDMP) का विमोचन भी किया। उन्होंने करीब सवा घंटे तक राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से लाइव मॉक ड्रिल की निगरानी कर विभिन्न जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने बरसात में खतरा पैदा करने वाले सूखे और जर्जर पेड़ों को तुरंत हटाने, सभी एसटीपी का सुरक्षा ऑडिट कराने और जनप्रतिनिधियों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल आपदा के बाद राहत देना नहीं, बल्कि उत्तराखंड को देश का सबसे तकनीक-सक्षम और जनभागीदारी आधारित आपदा प्रबंधन मॉडल बनाना है।



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