भूमि प्रबंधन एवं सुधारों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए: मुख्य सचिव

भूमि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, डिजिटलीकरण एवं निवेश अनुकूल व्यवस्था पर सचिव समिति में मंथन

YUGVARTA NEWS

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Lucknow, 23 Jun, 2026 04:42 PM
भूमि प्रबंधन एवं सुधारों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए: मुख्य सचिव

देहरादून। उत्तराखंड में भूमि प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और निवेश अनुकूल बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Anand Bardhan की अध्यक्षता में सचिवालय सभागार में आयोजित सचिव समिति की बैठक में राज्य के भूमि संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, प्रक्रियाओं के सरलीकरण, डिजिटलीकरण, विवाद निस्तारण और निवेशकों के लिए अनुकूल व्यवस्था विकसित करने को लेकर व्यापक मंथन किया गया।

बैठक के दौरान भूमि से जुड़े मामलों के बेहतर सेटलमेंट, निवेशकों के लिए भूमि उपलब्धता को आसान बनाने, नई तकनीकों के इस्तेमाल, विवाद निस्तारण प्रणाली को मजबूत करने, राजस्व वादों को कम करने, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और अपडेटेशन, जटिल राजस्व शब्दावली व प्रपत्रों को सरल बनाने तथा भूमि क्रय-विक्रय सहित सभी प्रक्रियाओं को पेपरलेस, कैशलेस और फेसलेस बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई।

तात्कालिक और दीर्घकालिक सुधारों पर फोकस

मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि प्रबंधन एवं सुधारों से जुड़े सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्रों में तात्कालिक और दीर्घकालिक सुधारों का विस्तृत अध्ययन कर ठोस कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे सीमित भूमि संसाधनों वाले राज्य में भूमि का वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रबंधन समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

उन्होंने दीर्घकालिक सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) गठित करने और उसके कार्यों की शासन स्तर पर नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।

भूमि सुधारों के लिए अधिकारियों की टीम गठित

मुख्य सचिव ने भूमि संबंधी मामलों की निगरानी और सुधारात्मक ढांचा तैयार करने के लिए सचिव दिलीप जावलकर, बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम और एस.एन. पाण्डेय की टीम गठित करने के निर्देश दिए। यह टीम भूमि संबंधी प्रकरणों, चुनौतियों और उनके समाधान पर आधारित समग्र फ्रेमवर्क तैयार कर सरकार को सुझाव देगी।

इसके अलावा भूमि संबंधी दस्तावेजों के अध्ययन, रिकॉर्ड के अद्यतनकरण, डिजिटलीकरण और तकनीकी एकीकरण के लिए तीन सदस्यीय अधिकारियों की अलग समिति गठित करने के निर्देश भी दिए गए। यह समिति पुराने रिकॉर्ड, नक्शों और अन्य दस्तावेजों का विस्तृत अध्ययन करेगी।

डिजिटल रिकॉर्ड और सर्वे सिस्टम को मिलेगा बढ़ावा

बैठक में भूमि सर्वेक्षण, बंदोबस्त, मैपिंग, पुराने अभिलेखों और रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण, भूमि रिकॉर्ड अपडेट करने तथा निर्धारित समयसीमा में पंजीकरण, दाखिल-खारिज, नोटिस और अन्य राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण पर विशेष जोर दिया गया।

मुख्य सचिव ने भूमि सर्वेक्षण और मैपिंग कार्यों के लिए नियुक्त एजेंसियों की कार्यप्रणाली की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

निवेश और विवाद-मुक्त व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता

बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भूमि प्रबंधन सुधारों का मुख्य उद्देश्य राज्य के सीमित भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना, निवेशकों के लिए भूमि उपलब्धता को आसान बनाना, भूमि बैंक प्रणाली को मजबूत करना और भूमि विवादों को न्यूनतम करना है।

इसके साथ ही न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाकर आम नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया। बैठक में सचिव एस.एन. पाण्डेय ने भूमि प्रबंधन सुधारों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जबकि विभिन्न विभागों के सचिवों ने अपने सुझाव और अनुभव साझा किए।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, एल.एल. फैनई, आर. मीनाक्षी सुंदरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

उत्तराखंड सरकार की यह पहल साफ संकेत दे रही है कि आने वाले समय में राज्य में भूमि प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक, डिजिटल और निवेशक हितैषी बनाने की दिशा में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


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